‘गौरीशंकर’ शब्द किस समास का उदाहरण है?
निर्देश- प्रश्न संख्या (238 से 244) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा सप्तप्रश्नानां उचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि दातव्यानि। एकस्मिं नदीतीरे एक: जम्बूवृक्ष: आसीत् । तस्मिन् एक: वानर: प्रतिवसति स्म। स: नित्यं तस्य फलानि खादति स्म। कश्चित् मकरोऽपि तस्यां नद्यामवसत् । वानर: प्रतिदिनं तस्मै जम्बूफलान्यच्छत् । तेन प्रीत: मकर: तस्य वानरस्य मित्रमभवत् । एकदा मकर: कानिचित् जम्बूफलानि पत्न्यै अपि दातुं आनयत् । तानि खादित्वा तस्य जाया अचिन्तयत् अहो! य: प्रतिदिनमीदृशानि मधुराणि फलानि खादति नूनं तस्य हृदयमपि अतिमधुरं भविष्यति। सा पतिमकथयत् - ‘भो:! जम्बूभक्षकस्य तव मित्रस्य हृदयमपि जम्बूवत् मधुरं भविष्यति। अहं तदेव खादितुमिच्छामि। तस्य हृदयभक्षणे मम बलवती स्पृहा। यदि मां जीवितां द्रष्टुमिच्छसि तर्हि आनय शीघ्रं तस्य वानरस्य हृदयम्’। पत्न्या: हठात् विवश: मकर: नदीतीरे गत्वा वानरमवदत् – ‘बन्धो! तव भ्रातृजाया त्वां द्रष्टुमिच्छति। अत: मम गृहमागच्छ’। वानर: अपृच्छत् - ‘कुत्र ते गृहम् ? कथमहं तत्र गन्तं शक्नोमि ?’ मकर: अवदत् - ‘अलं चिन्तया। अहं त्वां स्वपृष्ठे धृत्वा गृहं नेष्यामि’। तस्य वचनं श्रुत्वा विश्वस्त: वानर: तस्मात् वृक्षस्कन्धात् अवतीर्य मकरपृष्ठे उपाविशत् । नदीजले वानरं विवशं मत्वा मकर: अकथयत् – ‘मम पत्नी तव हृदयं खादितुमिच्छति। तस्यै तव हृदयं दातुमेव त्वां नयामि।’ चतुर: वानर: शीघ्रमकथयत् –‘अरे मूर्ख! कथं न पूर्वमेव निवेदितं त्वया? मम हृदयं तु वृक्षस्य कोटरे एव निहितम्। अत: शीघ्रं तत्रैव नय येन अहम् स्वहृदयमानीय भ्रातृजायायै दत्त्वा तां परितोषयामि इति।’ मूर्ख: मकर: तस्य गूढमाशयं अबुद्ध्वा वानरं पुनस्तमेव वृक्षमनयत् । तत: वृक्षमारुह्य वानर: अवदत् – ‘धिङ् मूर्ख! अपि हृदयं शरीरात् पृथक तिष्ठति ? गच्छ, अत: परं त्वया सह मम मैत्री समाप्ता, सत्यमुक्तं केनचित् कविना विश्वासो हि ययोर्मध्ये तयोर्मध्येअस्ति सौहृदम्। यस्मिन्नैवास्ति विश्वास: तस्मिन् मैत्री क्व सम्भवा।।
निर्देश (प्र. सं. 177 से 186) : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए।: शिक्षा की बैंकीय अवधारणा (बैंकिंग कॉनसेप्ट) में ज्ञान एक उपहार होता है, जो स्वयं को ज्ञानवान समझने वालों के द्वारा उनको दिया जाता है, जिन्हें वे नितान्त अज्ञानी मानते हैं। दूसरों को परम अज्ञानी बताना उत्पीड़न की विचारधारा की विशेषता है। वह शिक्षा और ज्ञान को जिज्ञासा की प्रक्रिया नहीं मानती। शिक्षक अपने छात्रों के समक्ष स्वयं को एक आवश्यक विलोम के रूप में प्रस्तुत करता है; उन्हें परम अज्ञानी मानकर वह अपने अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करता है। छात्र, हेगेलीय द्वन्द्ववाद में वर्णित दासों की भाँति, अलगाव के शिकार होने के कारण अपने अज्ञान को शिक्षक के अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करने वाला समझते हैं-लेकिन इस फर्क के साथ कि दास तो अपनी वास्तविकता को जान लेता है (कि मालिक का अस्तित्व उसके अस्तित्व पर निर्भर है) लेकिन ये छात्र अपनी इस वास्तविकता को कभी नहीं जान पाते कि वे भी शिक्षक को शिक्षित करते हैं।‘‘उन्हें परम अज्ञानी मानकर वह अपने अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करता है।’’ रेखांकित शब्द की जगह किस शब्द का प्रयोग किया जा सकता है?
What is the ranking of India in the 'Global Energy Transition Index 2024' released by the World Economic Forum on 19 June 2024 ?
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Which two number should be interchanged to make the following equation correct? 3 × 9 + 5 -18 ÷ 7 = 24
बाल मनोविज्ञान के आधार पर कौन-सा कथन सर्वोत्तम है?
पंचायत चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
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