Correct Answer:
Option D - द्वि-दैशिक स्लैब (Two way slab)-
जब स्लैब पूर्ण रूप से अगल-बगल की चारों दीवारों पर आलम्बित रहती है, तो इसे द्वि- दैशिक स्लैब कहते हैं।
जब स्लैब की लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 2 अथवा 2 से कम हो ( L ≤ 2B) तो इसे द्वि-दैशिक स्लैब कहते हैं।
द्वि दैशिक स्लैब में दोनों दिशाओं में एक दूसरे समकोण पर छड़े डाले जाती है और सभी छड़ मुख्य छड़ कहलाता है।
दोनों दिशाओं में प्रबलित होने के कारण,द्वि दैशिक स्लैब में वितरित छड़ (Distribution bars) की अलग से आवश्यकता नही रहती है।
द्वि-दैशिक स्लैब, शुद्धालम्ब अथवा दोनों दिशाओं अथवा एक दिशा में सतत हो सकती है।
कोनों पर ऐंठन का प्रभाव रोकने के लिये इन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रबलन दिया है।
D. द्वि-दैशिक स्लैब (Two way slab)-
जब स्लैब पूर्ण रूप से अगल-बगल की चारों दीवारों पर आलम्बित रहती है, तो इसे द्वि- दैशिक स्लैब कहते हैं।
जब स्लैब की लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 2 अथवा 2 से कम हो ( L ≤ 2B) तो इसे द्वि-दैशिक स्लैब कहते हैं।
द्वि दैशिक स्लैब में दोनों दिशाओं में एक दूसरे समकोण पर छड़े डाले जाती है और सभी छड़ मुख्य छड़ कहलाता है।
दोनों दिशाओं में प्रबलित होने के कारण,द्वि दैशिक स्लैब में वितरित छड़ (Distribution bars) की अलग से आवश्यकता नही रहती है।
द्वि-दैशिक स्लैब, शुद्धालम्ब अथवा दोनों दिशाओं अथवा एक दिशा में सतत हो सकती है।
कोनों पर ऐंठन का प्रभाव रोकने के लिये इन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रबलन दिया है।