Correct Answer:
Option A - शिशु बोध के अध्ययन के संदर्भ में, दृश्य वरीयता पद्धति के अग्रदूत ‘रॉबर्ट एल.फैट्रज’ थे। यह एक विकासात्मक मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने अधिमान्य दिखने वाले प्रतिमान सहित शिशु धारणा पर कई अध्ययन शुरु किए। फैट़्ज ने 1961 में केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में काम करते हुए इस प्रतिमान को पेश किया। अधिमान्य दिखाने वाले प्रतिमान का उपयोग संज्ञानात्मक विकास और वर्गीकरण के संबंध में शिशुओं के अध्ययन में किया जाता है। फैट़्ज के अध्ययन से पता चला है कि शिशु ने समान छवियों की तुलना में अधिक लम्बे पैटर्न वाली छवियों को देखा। बाद में उन्होंने 1964 में अपने अध्ययन के आधार पर आवास स्थितियों को शामिल किया। इन स्थितियों में नए या असामान्य उत्तेजनाओं के लिए शिशुओं की प्राथमिकता का प्रदर्शन किया।
A. शिशु बोध के अध्ययन के संदर्भ में, दृश्य वरीयता पद्धति के अग्रदूत ‘रॉबर्ट एल.फैट्रज’ थे। यह एक विकासात्मक मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने अधिमान्य दिखने वाले प्रतिमान सहित शिशु धारणा पर कई अध्ययन शुरु किए। फैट़्ज ने 1961 में केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में काम करते हुए इस प्रतिमान को पेश किया। अधिमान्य दिखाने वाले प्रतिमान का उपयोग संज्ञानात्मक विकास और वर्गीकरण के संबंध में शिशुओं के अध्ययन में किया जाता है। फैट़्ज के अध्ययन से पता चला है कि शिशु ने समान छवियों की तुलना में अधिक लम्बे पैटर्न वाली छवियों को देखा। बाद में उन्होंने 1964 में अपने अध्ययन के आधार पर आवास स्थितियों को शामिल किया। इन स्थितियों में नए या असामान्य उत्तेजनाओं के लिए शिशुओं की प्राथमिकता का प्रदर्शन किया।