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Q: In the context of psychosocial development in childhood, what is initiative versus guilt? बचपन में मनोसामाजिक विकास के संदर्भ में, पहल बनाम अपराध क्या है? I. It is Erikson's third stage in psychosocial development. I. यह मनोसामाजिक विकास मे एरिक्सन का तीसरा चरण है। II. In this stage children balance the urge to pursue goals with moral reservations that may prevent carrying them out. II. इस चरण में बच्चे नैतिक आरक्षण के साथ लक्ष्यों का पीछा करने की इच्छा को संतुलित करते हैं जो उन्हें पूरा करने से रोक सकता है।
  • A. ना ही I ना ही II/Neither I nor II
  • B. I तथा II दोनों/Both I and II
  • C. केवल I/Only I
  • D. केवल II/Only II
Correct Answer: Option B - मनोसामाजिक विकास के संदर्भ में कथन (I) व (II) दोनों सही है। एरिक एरिक्सन एक प्रसिद्ध मनोविष्लेशक थे जिसने मानव का सम्पूर्ण जीवनकाल के सामान्य विकास का मनोसामाजिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया। एरिक्सन सिद्धान्त का केन्द्रीय बिंदु यह है कि मानव का विकास कई पूर्वनिश्चित अवस्थाएँ जो सर्वजनीन हैं, से होकर होती है। जिस प्रक्रिया द्वारा वे अवस्थाएँ विकसित होती हैं, वह विशेष नियम द्वारा नियंत्रित होती है। इस नियम को पश्चजात नियम कहा जाता हे। एरिक्सन द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धान्त में मनोसामाजिक विकास की आठ अवस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं– (1) शैशवावस्था : विश्वास बनाम अविश्वास (2) प्रारम्भिक बाल्यावस्था : स्वतंत्रता बनाम लज्जाशीलता (3) खेल अवस्था : पहल शक्ति बनाम दोषिता (4) स्कूल अवस्था : परिश्रम बनाम हीनता (5) किशोरावस्था : अहम् पहचान बनाम भूमिका संभ्रान्ति (6) तरूण वयस्कावस्था : घनिष्ठ बनाम विलगन (7) मध्य वयस्कावस्था : जननात्मक्ता बनाम स्थिरता (8) परिपक्वता : अहम् सम्पूर्णता बनाम निराशा उपयुक्त प्रश्नानुसार एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धान्त की तीसरी अवस्था (पहलशक्ति बनाम दोषिता) में एरिक्सन के अनुसार जब बच्चा पहलशक्ति बनाम दोषिता के संघर्ष का सफलतापूर्वक हल खोज लेता है तो उसमें उद्देश्य नामक एक नयी मनोसामाजिक शक्ति विकसित होती है। इस शक्ति के बलबूते बच्चे में अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करने की क्षमता तथा साथ ही उसे बिना किसी डर के प्राप्त करने की सामर्थ्य का भी विकास होता है।
B. मनोसामाजिक विकास के संदर्भ में कथन (I) व (II) दोनों सही है। एरिक एरिक्सन एक प्रसिद्ध मनोविष्लेशक थे जिसने मानव का सम्पूर्ण जीवनकाल के सामान्य विकास का मनोसामाजिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया। एरिक्सन सिद्धान्त का केन्द्रीय बिंदु यह है कि मानव का विकास कई पूर्वनिश्चित अवस्थाएँ जो सर्वजनीन हैं, से होकर होती है। जिस प्रक्रिया द्वारा वे अवस्थाएँ विकसित होती हैं, वह विशेष नियम द्वारा नियंत्रित होती है। इस नियम को पश्चजात नियम कहा जाता हे। एरिक्सन द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धान्त में मनोसामाजिक विकास की आठ अवस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं– (1) शैशवावस्था : विश्वास बनाम अविश्वास (2) प्रारम्भिक बाल्यावस्था : स्वतंत्रता बनाम लज्जाशीलता (3) खेल अवस्था : पहल शक्ति बनाम दोषिता (4) स्कूल अवस्था : परिश्रम बनाम हीनता (5) किशोरावस्था : अहम् पहचान बनाम भूमिका संभ्रान्ति (6) तरूण वयस्कावस्था : घनिष्ठ बनाम विलगन (7) मध्य वयस्कावस्था : जननात्मक्ता बनाम स्थिरता (8) परिपक्वता : अहम् सम्पूर्णता बनाम निराशा उपयुक्त प्रश्नानुसार एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धान्त की तीसरी अवस्था (पहलशक्ति बनाम दोषिता) में एरिक्सन के अनुसार जब बच्चा पहलशक्ति बनाम दोषिता के संघर्ष का सफलतापूर्वक हल खोज लेता है तो उसमें उद्देश्य नामक एक नयी मनोसामाजिक शक्ति विकसित होती है। इस शक्ति के बलबूते बच्चे में अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करने की क्षमता तथा साथ ही उसे बिना किसी डर के प्राप्त करने की सामर्थ्य का भी विकास होता है।

Explanations:

मनोसामाजिक विकास के संदर्भ में कथन (I) व (II) दोनों सही है। एरिक एरिक्सन एक प्रसिद्ध मनोविष्लेशक थे जिसने मानव का सम्पूर्ण जीवनकाल के सामान्य विकास का मनोसामाजिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया। एरिक्सन सिद्धान्त का केन्द्रीय बिंदु यह है कि मानव का विकास कई पूर्वनिश्चित अवस्थाएँ जो सर्वजनीन हैं, से होकर होती है। जिस प्रक्रिया द्वारा वे अवस्थाएँ विकसित होती हैं, वह विशेष नियम द्वारा नियंत्रित होती है। इस नियम को पश्चजात नियम कहा जाता हे। एरिक्सन द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धान्त में मनोसामाजिक विकास की आठ अवस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं– (1) शैशवावस्था : विश्वास बनाम अविश्वास (2) प्रारम्भिक बाल्यावस्था : स्वतंत्रता बनाम लज्जाशीलता (3) खेल अवस्था : पहल शक्ति बनाम दोषिता (4) स्कूल अवस्था : परिश्रम बनाम हीनता (5) किशोरावस्था : अहम् पहचान बनाम भूमिका संभ्रान्ति (6) तरूण वयस्कावस्था : घनिष्ठ बनाम विलगन (7) मध्य वयस्कावस्था : जननात्मक्ता बनाम स्थिरता (8) परिपक्वता : अहम् सम्पूर्णता बनाम निराशा उपयुक्त प्रश्नानुसार एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धान्त की तीसरी अवस्था (पहलशक्ति बनाम दोषिता) में एरिक्सन के अनुसार जब बच्चा पहलशक्ति बनाम दोषिता के संघर्ष का सफलतापूर्वक हल खोज लेता है तो उसमें उद्देश्य नामक एक नयी मनोसामाजिक शक्ति विकसित होती है। इस शक्ति के बलबूते बच्चे में अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करने की क्षमता तथा साथ ही उसे बिना किसी डर के प्राप्त करने की सामर्थ्य का भी विकास होता है।