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Q: ‘असाध्य वीणा’ के रचनाकार हैं
  • A. महादेवी वर्मा
  • B. अज्ञेय
  • C. सुमित्रानन्दन पंत
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - ‘असाध्यवीणा’ के रचनाकार अज्ञेय है। ⇒ ‘असाध्यवीणा’ कविता अज्ञेय के काव्य संग्रह ‘आँगन के पार द्वार’ (1961) में संकलित ळ। ‘असाध्य वीणा’ एक लम्बी कवित है। इसका मूल भाव ‘अहं का विसर्जन’ है। यह कविता ‘आकोकुरा’ की पुस्तक ‘द बुक ऑफ टी’ में ‘टेमिंग ऑफ द हार्प’ शीर्षक कहानी से प्रभावित है। ⇒ अज्ञेय अस्तित्ववाद में आस्था रखने वाले कवि है। इन्हें प्रयोग वाद तथा प्रगतिवाद का शलाका पुरुष भी कहा जाता है। अज्ञेय के काव्य-संग्रह-भग्नदूत (1933), चिन्ता (1942), इत्यलम (1946), हरी घास पर क्षणभर (1949), बावरा अहेरी (1954), इंद्रधनुष रौंदे हुए में (1957), अरी ओकरूणा प्रभामय (1959), आँगन के पार द्वार (1961), पूर्वा (1965), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (=98=) हॅूं (1973), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (1981) ऐसा कोई घर आपे देखा है (1986)।
B. ‘असाध्यवीणा’ के रचनाकार अज्ञेय है। ⇒ ‘असाध्यवीणा’ कविता अज्ञेय के काव्य संग्रह ‘आँगन के पार द्वार’ (1961) में संकलित ळ। ‘असाध्य वीणा’ एक लम्बी कवित है। इसका मूल भाव ‘अहं का विसर्जन’ है। यह कविता ‘आकोकुरा’ की पुस्तक ‘द बुक ऑफ टी’ में ‘टेमिंग ऑफ द हार्प’ शीर्षक कहानी से प्रभावित है। ⇒ अज्ञेय अस्तित्ववाद में आस्था रखने वाले कवि है। इन्हें प्रयोग वाद तथा प्रगतिवाद का शलाका पुरुष भी कहा जाता है। अज्ञेय के काव्य-संग्रह-भग्नदूत (1933), चिन्ता (1942), इत्यलम (1946), हरी घास पर क्षणभर (1949), बावरा अहेरी (1954), इंद्रधनुष रौंदे हुए में (1957), अरी ओकरूणा प्रभामय (1959), आँगन के पार द्वार (1961), पूर्वा (1965), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (=98=) हॅूं (1973), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (1981) ऐसा कोई घर आपे देखा है (1986)।

Explanations:

‘असाध्यवीणा’ के रचनाकार अज्ञेय है। ⇒ ‘असाध्यवीणा’ कविता अज्ञेय के काव्य संग्रह ‘आँगन के पार द्वार’ (1961) में संकलित ळ। ‘असाध्य वीणा’ एक लम्बी कवित है। इसका मूल भाव ‘अहं का विसर्जन’ है। यह कविता ‘आकोकुरा’ की पुस्तक ‘द बुक ऑफ टी’ में ‘टेमिंग ऑफ द हार्प’ शीर्षक कहानी से प्रभावित है। ⇒ अज्ञेय अस्तित्ववाद में आस्था रखने वाले कवि है। इन्हें प्रयोग वाद तथा प्रगतिवाद का शलाका पुरुष भी कहा जाता है। अज्ञेय के काव्य-संग्रह-भग्नदूत (1933), चिन्ता (1942), इत्यलम (1946), हरी घास पर क्षणभर (1949), बावरा अहेरी (1954), इंद्रधनुष रौंदे हुए में (1957), अरी ओकरूणा प्रभामय (1959), आँगन के पार द्वार (1961), पूर्वा (1965), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (=98=) हॅूं (1973), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (1981) ऐसा कोई घर आपे देखा है (1986)।