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Q: In the context of childhood medical problems, which of the following statement is correct ? बाल चिकित्सा समस्याओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? I. Acute medical conditions - Occasional and short - term conditions, such as infections, allergies and warts. I. तीव्र चिकित्सा स्थितियां – समसामयिक और अल्पकालिक स्थितियाँ, जैसे संक्रमण, एलर्जी और मस्सा। II. Chronic medical conditions - Physical, developmental, behavioral and emotional conditions requiring special health services. II. पुरानी चिकित्सा स्थितियाँ– विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता वाली शारीरिक, विकासात्मक, व्यवहारिक और भावनात्मक स्थितियाँ।
  • A. Only I/केवल I
  • B. Both I and II/I तथा II दोनों
  • C. Neither I nor II/ना ही I ना ही II
  • D. Only II/केवल II
Correct Answer: Option B - उपयुक्त दिए गए दोनों कथन (I) व (II) बचपन की चिकित्सीय समस्या के संदर्भ में सही हैं। बचपन की चिकित्सीय समस्या या बचपन की बिमारी और विकार कोई भी बिमारी, दुर्बलता, या असामान्य स्थिति जो मुख्य रूप से शिशुओं और बच्चों को प्रभावित करती हैं– यानी वे उम्र में जो भ्रूण से शुरू होती हैं और किशोरावस्था तक फैली हुई हैं। बाल्यावस्था एक ऐसी अवधि है जो बच्चे और तत्काल वातावरण दोनों में परिवर्तन इतने जल्दी लाती है कि यह लगभग ऐसा है जैसे कि बच्चा शैशवावस्था, बचपन और किशोरावस्था से गुजरने वाले विशिष्ट लेकिन संबंधित व्यक्तियों की एक शृंखला थी। पर्यावरण में परिवर्तन तब होते हैं जब एक पूरी तरह से आश्रित शिशु के परिवेश और सम्पर्क उत्तरोत्तर अधिक स्वतंत्र बच्चे और किशोर के हो जाते है। गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक की अवधि बचपन की चिकित्सीय समस्या को परिवर्तनों की इस पृष्टभूमि के खिलाफ समझा जाना चाहिए। वह चिकित्सीय समस्याएँ प्राय: दो रूपों में देखी जाती हैं– (1) एक्यूट चिकित्सकीय अवस्था : यह अवस्था कम समय के लिए होती है। इसमें कभी-कभार होने वाली बिमारियाँ जैसे, संक्रमण, एलर्जी, वार्ट्स , मौसमी बिमारी आती है। (2) चिरकालिक चिकित्सकीय अवस्था : इस अवस्था में लम्बी एवं दीर्घ-कालिक बिमारियाँ आती है। जो शारीरिक, विकासात्मक, व्यवहारिक एवं भावात्मक रूप में प्रदर्शित होती है।
B. उपयुक्त दिए गए दोनों कथन (I) व (II) बचपन की चिकित्सीय समस्या के संदर्भ में सही हैं। बचपन की चिकित्सीय समस्या या बचपन की बिमारी और विकार कोई भी बिमारी, दुर्बलता, या असामान्य स्थिति जो मुख्य रूप से शिशुओं और बच्चों को प्रभावित करती हैं– यानी वे उम्र में जो भ्रूण से शुरू होती हैं और किशोरावस्था तक फैली हुई हैं। बाल्यावस्था एक ऐसी अवधि है जो बच्चे और तत्काल वातावरण दोनों में परिवर्तन इतने जल्दी लाती है कि यह लगभग ऐसा है जैसे कि बच्चा शैशवावस्था, बचपन और किशोरावस्था से गुजरने वाले विशिष्ट लेकिन संबंधित व्यक्तियों की एक शृंखला थी। पर्यावरण में परिवर्तन तब होते हैं जब एक पूरी तरह से आश्रित शिशु के परिवेश और सम्पर्क उत्तरोत्तर अधिक स्वतंत्र बच्चे और किशोर के हो जाते है। गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक की अवधि बचपन की चिकित्सीय समस्या को परिवर्तनों की इस पृष्टभूमि के खिलाफ समझा जाना चाहिए। वह चिकित्सीय समस्याएँ प्राय: दो रूपों में देखी जाती हैं– (1) एक्यूट चिकित्सकीय अवस्था : यह अवस्था कम समय के लिए होती है। इसमें कभी-कभार होने वाली बिमारियाँ जैसे, संक्रमण, एलर्जी, वार्ट्स , मौसमी बिमारी आती है। (2) चिरकालिक चिकित्सकीय अवस्था : इस अवस्था में लम्बी एवं दीर्घ-कालिक बिमारियाँ आती है। जो शारीरिक, विकासात्मक, व्यवहारिक एवं भावात्मक रूप में प्रदर्शित होती है।

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उपयुक्त दिए गए दोनों कथन (I) व (II) बचपन की चिकित्सीय समस्या के संदर्भ में सही हैं। बचपन की चिकित्सीय समस्या या बचपन की बिमारी और विकार कोई भी बिमारी, दुर्बलता, या असामान्य स्थिति जो मुख्य रूप से शिशुओं और बच्चों को प्रभावित करती हैं– यानी वे उम्र में जो भ्रूण से शुरू होती हैं और किशोरावस्था तक फैली हुई हैं। बाल्यावस्था एक ऐसी अवधि है जो बच्चे और तत्काल वातावरण दोनों में परिवर्तन इतने जल्दी लाती है कि यह लगभग ऐसा है जैसे कि बच्चा शैशवावस्था, बचपन और किशोरावस्था से गुजरने वाले विशिष्ट लेकिन संबंधित व्यक्तियों की एक शृंखला थी। पर्यावरण में परिवर्तन तब होते हैं जब एक पूरी तरह से आश्रित शिशु के परिवेश और सम्पर्क उत्तरोत्तर अधिक स्वतंत्र बच्चे और किशोर के हो जाते है। गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक की अवधि बचपन की चिकित्सीय समस्या को परिवर्तनों की इस पृष्टभूमि के खिलाफ समझा जाना चाहिए। वह चिकित्सीय समस्याएँ प्राय: दो रूपों में देखी जाती हैं– (1) एक्यूट चिकित्सकीय अवस्था : यह अवस्था कम समय के लिए होती है। इसमें कभी-कभार होने वाली बिमारियाँ जैसे, संक्रमण, एलर्जी, वार्ट्स , मौसमी बिमारी आती है। (2) चिरकालिक चिकित्सकीय अवस्था : इस अवस्था में लम्बी एवं दीर्घ-कालिक बिमारियाँ आती है। जो शारीरिक, विकासात्मक, व्यवहारिक एवं भावात्मक रूप में प्रदर्शित होती है।