Correct Answer:
Option B - गहरी घाटियों में उत्स्रुत कुएँ प्राय: पाये जाते हैं। अधिक ढाल पर दो अप्रवेश्य तहों के बीच फँसी प्रवेश्य तह में जलीय दाब के कारण पानी बाहर आने की चेष्ट करता है। ज्यों ही इस जलधारी तह को भेदा जाता है, यह दाबयुक्त जल अपने आप कुएँ से फूट पड़ता है।
यदि पीजोमेट्रिक सतह, भूमि तल पर कुएँ के शीर्ष की ऊँचाई से अधिक है तो पानी स्वत: ही ऊपर की ओर उठने लगेगा और बिना किसी पम्प के भूमि की सतह पर आ जाता है। इस प्रकार के कुओं को बहते कुएँ (Flowing wells) या या पाताल तोड़ कुएँ भी कहते हैं।
B. गहरी घाटियों में उत्स्रुत कुएँ प्राय: पाये जाते हैं। अधिक ढाल पर दो अप्रवेश्य तहों के बीच फँसी प्रवेश्य तह में जलीय दाब के कारण पानी बाहर आने की चेष्ट करता है। ज्यों ही इस जलधारी तह को भेदा जाता है, यह दाबयुक्त जल अपने आप कुएँ से फूट पड़ता है।
यदि पीजोमेट्रिक सतह, भूमि तल पर कुएँ के शीर्ष की ऊँचाई से अधिक है तो पानी स्वत: ही ऊपर की ओर उठने लगेगा और बिना किसी पम्प के भूमि की सतह पर आ जाता है। इस प्रकार के कुओं को बहते कुएँ (Flowing wells) या या पाताल तोड़ कुएँ भी कहते हैं।