Correct Answer:
Option C - मौर्य प्रशासन का भारतीय प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह भारत की प्रथम केन्द्रीकृत प्रशासन प्रणाली का उल्लेख है। प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा होता था। वह कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका का प्रमुख था। अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों का उल्लेख है। मुख्य तीर्थ इस प्रकार है।
प्रधानमंत्री और पुरोहित - पुरोहित प्रमुख धर्माधिकारी होते थे। चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में ये दोनों विभाग कौटिल्य के अधीन थे।
समाहर्ता - यह राजस्व विभाग का प्रधान अधिकारी था।
सन्निधाता- राजकीय कोषाध्यक्ष था।
प्रदेष्टा - फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश
व्यवहारिक - दीवानी न्यायालय का न्यायाधीश
C. मौर्य प्रशासन का भारतीय प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह भारत की प्रथम केन्द्रीकृत प्रशासन प्रणाली का उल्लेख है। प्रशासन का केन्द्र बिन्दु राजा होता था। वह कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका का प्रमुख था। अर्थशास्त्र में 18 तीर्थों का उल्लेख है। मुख्य तीर्थ इस प्रकार है।
प्रधानमंत्री और पुरोहित - पुरोहित प्रमुख धर्माधिकारी होते थे। चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में ये दोनों विभाग कौटिल्य के अधीन थे।
समाहर्ता - यह राजस्व विभाग का प्रधान अधिकारी था।
सन्निधाता- राजकीय कोषाध्यक्ष था।
प्रदेष्टा - फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश
व्यवहारिक - दीवानी न्यायालय का न्यायाधीश