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Q: In Madhya Pradesh the Sanjha Geet, Vasdeva, Bhopa and Kalgi Turra are the styles of: मध्य प्रदेश में, सांझा गीत, बासदेव, भोपा व कल्गी तुर्रा किसके प्रकार हैं?
  • A. Folk dances/लोक नृत्य
  • B. Folk singing/लोक गायन
  • C. Classical dances/शास्त्रीय नृत्य
  • D. Local paintings/स्थानीय चित्रण
Correct Answer: Option B - मध्य प्रदेश में सांझा गीत, बासदेव, भोपा व कल्गी तुर्रा लोकगायन है। मालवा क्षेत्र में सांझा गीत किशोरियों की पारम्परिक गायन पद्धति है। इसमें वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं होता है। बासदेव बघेलखण्ड का एक पारम्परिक गायन है, जो हरबोले जाति द्वारा गाया जाता है, कल्गी तुर्रा निमाड़ क्षेत्र प्रतिस्पर्धात्मक लोक गायन शैली है। यह एक प्राचीन लोक गायकी है, जिसका प्रसार निमाड़ क्षेत्र से मालवा तक है।
B. मध्य प्रदेश में सांझा गीत, बासदेव, भोपा व कल्गी तुर्रा लोकगायन है। मालवा क्षेत्र में सांझा गीत किशोरियों की पारम्परिक गायन पद्धति है। इसमें वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं होता है। बासदेव बघेलखण्ड का एक पारम्परिक गायन है, जो हरबोले जाति द्वारा गाया जाता है, कल्गी तुर्रा निमाड़ क्षेत्र प्रतिस्पर्धात्मक लोक गायन शैली है। यह एक प्राचीन लोक गायकी है, जिसका प्रसार निमाड़ क्षेत्र से मालवा तक है।

Explanations:

मध्य प्रदेश में सांझा गीत, बासदेव, भोपा व कल्गी तुर्रा लोकगायन है। मालवा क्षेत्र में सांझा गीत किशोरियों की पारम्परिक गायन पद्धति है। इसमें वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं होता है। बासदेव बघेलखण्ड का एक पारम्परिक गायन है, जो हरबोले जाति द्वारा गाया जाता है, कल्गी तुर्रा निमाड़ क्षेत्र प्रतिस्पर्धात्मक लोक गायन शैली है। यह एक प्राचीन लोक गायकी है, जिसका प्रसार निमाड़ क्षेत्र से मालवा तक है।