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Q: आचार्य भरतमुनि ने नाटक में ‘अभिनय’ को किस वेद से लिया गया माना है?
  • A. ऋग्वेद
  • B. सामवेद
  • C. यजुर्वेद
  • D. अथर्ववेद
Correct Answer: Option C - आचार्य भरतमुनि ने नाटक में ‘अभिनय’ को यजुर्वेद से लिया गया माना है। भरतमुनि द्वारा रचित ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रंथ है। इसमें सर्वप्रथम रस सिद्धान्त की चर्चा तथा इसके प्रसिद्ध सूत्र- ‘‘विभावानुभावव्यभिचारीसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’’ की स्थापना की गयी। दंतकथा की मान्यता है कि इंद्र की प्रार्थना पर ब्रह्मा ने चारों वर्णों और विशेष रूप से शूद्रों के मनोरंजन और अलौकिक आनन्द के लिए ‘नाट्यवेद’ नामक पाँचवे वेद का निर्माण किया। इस वेद के निर्माण में- ऋग्वेद से ‘पाठ्यवस्तु’, सामवेद से ‘गान’, यजुर्वेद से ‘अभिनय’ और अथर्ववेद से ‘रस’ लिया गया है।
C. आचार्य भरतमुनि ने नाटक में ‘अभिनय’ को यजुर्वेद से लिया गया माना है। भरतमुनि द्वारा रचित ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रंथ है। इसमें सर्वप्रथम रस सिद्धान्त की चर्चा तथा इसके प्रसिद्ध सूत्र- ‘‘विभावानुभावव्यभिचारीसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’’ की स्थापना की गयी। दंतकथा की मान्यता है कि इंद्र की प्रार्थना पर ब्रह्मा ने चारों वर्णों और विशेष रूप से शूद्रों के मनोरंजन और अलौकिक आनन्द के लिए ‘नाट्यवेद’ नामक पाँचवे वेद का निर्माण किया। इस वेद के निर्माण में- ऋग्वेद से ‘पाठ्यवस्तु’, सामवेद से ‘गान’, यजुर्वेद से ‘अभिनय’ और अथर्ववेद से ‘रस’ लिया गया है।

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आचार्य भरतमुनि ने नाटक में ‘अभिनय’ को यजुर्वेद से लिया गया माना है। भरतमुनि द्वारा रचित ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रंथ है। इसमें सर्वप्रथम रस सिद्धान्त की चर्चा तथा इसके प्रसिद्ध सूत्र- ‘‘विभावानुभावव्यभिचारीसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:’’ की स्थापना की गयी। दंतकथा की मान्यता है कि इंद्र की प्रार्थना पर ब्रह्मा ने चारों वर्णों और विशेष रूप से शूद्रों के मनोरंजन और अलौकिक आनन्द के लिए ‘नाट्यवेद’ नामक पाँचवे वेद का निर्माण किया। इस वेद के निर्माण में- ऋग्वेद से ‘पाठ्यवस्तु’, सामवेद से ‘गान’, यजुर्वेद से ‘अभिनय’ और अथर्ववेद से ‘रस’ लिया गया है।