Explanations:
गुप्तकाल में ताम्र की मुद्रा का प्रचलन समुद्रगुप्त ने कराया। गुप्त शासकों ने सोने चाँदी एवं ताँबे के सिक्के चलाए। गुप्तों के स्वर्ण सिक्कों को दीनार कहा जाता था। गुप्त शासकों में सर्वप्रथम चन्द्रगुप्त II ने शकों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में चाँदी के सिक्के चलाये जो कि शक मानक के अनुरूप लगभग 26.3 ग्रेन से 32 ग्रेन के थे। समुद्रगुप्त ने सर्वप्रथम (गुप्तकाल में) ताम्र मुद्रा का प्रचलन किया।