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Q: In cleat wiring, cleats shall be fixed at regular intervals not exceeding _____ meters. क्लीट वायिंरग में, क्लीट्स नियमित अंतराल पर लगाए जाने चाहिए जिन्हें ......... मीटर से अधिक पर नहीं होना चाहिए।
  • A. 0.4
  • B. 0.6
  • C. 0.7
  • D. 0.5
Correct Answer: Option B - क्लीट वायरिंग में क्लीट्स नियमित अन्तराल पर लगाये जाने चाहिए जिन्हें 0.6 मीटर से अधिक पर नही होना चाहिए। क्लीट वायरिंग– ■ यह तार स्थापन प्रणाली अस्थायी प्रकार की है तथा नमी वाले स्थानों व दर्शनीय स्थानों के लिए उपयुक्त नहीं है। ■ तार स्थापन आधार के रूप में पोर्सिलेन के दो मार्गी या तीन मार्गी क्लीट उपयोग में लाये जाते है जिन्हें लकड़ी की गुल्लियों में स्थापित किया जाता है। ■ क्लीट की परस्पर दूरी सामान्यत: 30 सेमी रखी जाती है तथा किसी भी स्थिति में ये 60 सेमी से अधिक दूरी पर नहीं होती है। ■ इस तार स्थापन में PVC या VIR प्रकार की केबिल उपयोग मे लायी जाती है। ■ तार स्थापन की यह प्रणाली सबसे सरल तथा सस्ती है।
B. क्लीट वायरिंग में क्लीट्स नियमित अन्तराल पर लगाये जाने चाहिए जिन्हें 0.6 मीटर से अधिक पर नही होना चाहिए। क्लीट वायरिंग– ■ यह तार स्थापन प्रणाली अस्थायी प्रकार की है तथा नमी वाले स्थानों व दर्शनीय स्थानों के लिए उपयुक्त नहीं है। ■ तार स्थापन आधार के रूप में पोर्सिलेन के दो मार्गी या तीन मार्गी क्लीट उपयोग में लाये जाते है जिन्हें लकड़ी की गुल्लियों में स्थापित किया जाता है। ■ क्लीट की परस्पर दूरी सामान्यत: 30 सेमी रखी जाती है तथा किसी भी स्थिति में ये 60 सेमी से अधिक दूरी पर नहीं होती है। ■ इस तार स्थापन में PVC या VIR प्रकार की केबिल उपयोग मे लायी जाती है। ■ तार स्थापन की यह प्रणाली सबसे सरल तथा सस्ती है।

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क्लीट वायरिंग में क्लीट्स नियमित अन्तराल पर लगाये जाने चाहिए जिन्हें 0.6 मीटर से अधिक पर नही होना चाहिए। क्लीट वायरिंग– ■ यह तार स्थापन प्रणाली अस्थायी प्रकार की है तथा नमी वाले स्थानों व दर्शनीय स्थानों के लिए उपयुक्त नहीं है। ■ तार स्थापन आधार के रूप में पोर्सिलेन के दो मार्गी या तीन मार्गी क्लीट उपयोग में लाये जाते है जिन्हें लकड़ी की गुल्लियों में स्थापित किया जाता है। ■ क्लीट की परस्पर दूरी सामान्यत: 30 सेमी रखी जाती है तथा किसी भी स्थिति में ये 60 सेमी से अधिक दूरी पर नहीं होती है। ■ इस तार स्थापन में PVC या VIR प्रकार की केबिल उपयोग मे लायी जाती है। ■ तार स्थापन की यह प्रणाली सबसे सरल तथा सस्ती है।