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Q: निम्न में से किस वेद को ʻकर्मकांड ग्रंथ (Book of rituals)ʼ के रूप में जाना जाता है ?
  • A. यजुर्वेद
  • B. सामवेद
  • C. ऋग्वेद
  • D. अथर्ववेद
Correct Answer: Option A - यजुर्वेद को ʻकर्मकांड ग्रंथʼ के रूप में जाना जाता है, जो कि बलिदान धर्म की स्थापना करता है। इसे यज्ञवेद भी कहते है। इसके पाठकर्ता को अध्वर्यु कहा जाता है। इसमें यज्ञों के नियम, विधि विधानों का संकलन तथा बलिदान विधि का वर्णन मिलता है। यह एक ऐसा वेद है, जो गद्य एवं पद्य दोनों में है। जबकि ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं लगभग 10,600 ऋचाएं हैं। इसके ऋचाओं को पढ़ने वाले ऋषि को ʻहोतृʼ कहते हैं। सामवेद में यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाले ऋचाओं (मंत्रों) का संकलन है। इसके पाठकर्ता को उद्गाता कहते हैं। तथा अथर्ववेद, अथर्वा ऋषि द्वारा रचित है, जिसमें कुल 731 सूक्त और 6000 मंत्र है।
A. यजुर्वेद को ʻकर्मकांड ग्रंथʼ के रूप में जाना जाता है, जो कि बलिदान धर्म की स्थापना करता है। इसे यज्ञवेद भी कहते है। इसके पाठकर्ता को अध्वर्यु कहा जाता है। इसमें यज्ञों के नियम, विधि विधानों का संकलन तथा बलिदान विधि का वर्णन मिलता है। यह एक ऐसा वेद है, जो गद्य एवं पद्य दोनों में है। जबकि ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं लगभग 10,600 ऋचाएं हैं। इसके ऋचाओं को पढ़ने वाले ऋषि को ʻहोतृʼ कहते हैं। सामवेद में यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाले ऋचाओं (मंत्रों) का संकलन है। इसके पाठकर्ता को उद्गाता कहते हैं। तथा अथर्ववेद, अथर्वा ऋषि द्वारा रचित है, जिसमें कुल 731 सूक्त और 6000 मंत्र है।

Explanations:

यजुर्वेद को ʻकर्मकांड ग्रंथʼ के रूप में जाना जाता है, जो कि बलिदान धर्म की स्थापना करता है। इसे यज्ञवेद भी कहते है। इसके पाठकर्ता को अध्वर्यु कहा जाता है। इसमें यज्ञों के नियम, विधि विधानों का संकलन तथा बलिदान विधि का वर्णन मिलता है। यह एक ऐसा वेद है, जो गद्य एवं पद्य दोनों में है। जबकि ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं लगभग 10,600 ऋचाएं हैं। इसके ऋचाओं को पढ़ने वाले ऋषि को ʻहोतृʼ कहते हैं। सामवेद में यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाले ऋचाओं (मंत्रों) का संकलन है। इसके पाठकर्ता को उद्गाता कहते हैं। तथा अथर्ववेद, अथर्वा ऋषि द्वारा रचित है, जिसमें कुल 731 सूक्त और 6000 मंत्र है।