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Q: How should teacher promote gender equality ? शिक्षक को लैंगिक समानता को कैसे बढ़ावा देना चाहिए। I. They should consciouly monitor their own conduct. I. उन्हें सचेत रूप से अपने आचरण की निगरानी करनी चाहिए। II. They should avoid sexist bias in the use of their language. II. उन्हें अपनी भाषा के उपयोग में लैंगिक पक्षपात से बचना चाहिए। III. They should avoid tendency to assign cleaning up tasks exclusively for girls. III. उन्हें केवल लड़कियों के लिए सफाई कार्य सौंपने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
  • A. I and II/I तथा II
  • B. I and III/I तथा III
  • C. II and III/II तथा III
  • D. I, II and III/I, II तथा III
Correct Answer: Option D - लैंगिक समानता के बारे में उपर्युक्त तीनों कथन (I) (II) (III) सही है। लैंगिक समानता या जेंडर समानता वह अवस्था है जब सभी मनुष्य अपने जैविक अंतरों के बावजूद सभी अवसरों, संसाधनों आदि के लिए आसान और समान पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें अपना भविष्य विकसित करने में समानता आर्थिक भागीदारी में समानता, उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने में समानता, उनके जीवन में लगभग हर चीज में समानता लाने की अनुमति दी जानी चाहिए। शिक्षक को विद्यालय में लैंगिक संवेदनशीलता के लिए कार्यकर्ता के रूप में कार्य करना होगा। स्वयं उन्हें इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा, जिससे वे समानता का वातावरण विद्यालय में उत्पन्न करे सके। उन्हें सचेत रूप से अपने आचरण की निगरानी करनी चाहिए क्योंकि बच्चे अपने शिक्षक को रोल मॉडल मानते है। शिक्षक को अपनी भाषा के उपयोग में लैंगिक पक्षपात से बचना चाहिए एवं उन्हें बच्चों की कार्य विधि को करने में समानता लानी है।
D. लैंगिक समानता के बारे में उपर्युक्त तीनों कथन (I) (II) (III) सही है। लैंगिक समानता या जेंडर समानता वह अवस्था है जब सभी मनुष्य अपने जैविक अंतरों के बावजूद सभी अवसरों, संसाधनों आदि के लिए आसान और समान पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें अपना भविष्य विकसित करने में समानता आर्थिक भागीदारी में समानता, उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने में समानता, उनके जीवन में लगभग हर चीज में समानता लाने की अनुमति दी जानी चाहिए। शिक्षक को विद्यालय में लैंगिक संवेदनशीलता के लिए कार्यकर्ता के रूप में कार्य करना होगा। स्वयं उन्हें इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा, जिससे वे समानता का वातावरण विद्यालय में उत्पन्न करे सके। उन्हें सचेत रूप से अपने आचरण की निगरानी करनी चाहिए क्योंकि बच्चे अपने शिक्षक को रोल मॉडल मानते है। शिक्षक को अपनी भाषा के उपयोग में लैंगिक पक्षपात से बचना चाहिए एवं उन्हें बच्चों की कार्य विधि को करने में समानता लानी है।

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लैंगिक समानता के बारे में उपर्युक्त तीनों कथन (I) (II) (III) सही है। लैंगिक समानता या जेंडर समानता वह अवस्था है जब सभी मनुष्य अपने जैविक अंतरों के बावजूद सभी अवसरों, संसाधनों आदि के लिए आसान और समान पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें अपना भविष्य विकसित करने में समानता आर्थिक भागीदारी में समानता, उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने में समानता, उनके जीवन में लगभग हर चीज में समानता लाने की अनुमति दी जानी चाहिए। शिक्षक को विद्यालय में लैंगिक संवेदनशीलता के लिए कार्यकर्ता के रूप में कार्य करना होगा। स्वयं उन्हें इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा, जिससे वे समानता का वातावरण विद्यालय में उत्पन्न करे सके। उन्हें सचेत रूप से अपने आचरण की निगरानी करनी चाहिए क्योंकि बच्चे अपने शिक्षक को रोल मॉडल मानते है। शिक्षक को अपनी भाषा के उपयोग में लैंगिक पक्षपात से बचना चाहिए एवं उन्हें बच्चों की कार्य विधि को करने में समानता लानी है।