Correct Answer:
Option D - हिन्दी व्याकरण में व्यंजन का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, व्यंजन से ही हिन्दी वर्णमाला तैयार होती है व्यंजन के कारण ही इस भाषा को लिखना पढ़ना आसान होता हैं स्वरों की सहयाता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं। जिन ध्वनियों का उच्चारण करते समय श्वास मुख के किसी स्थान विशेष (तालु, मूर्धा, ओष्ठ या दाँत) आदि का स्पर्श करते हुए निकले उन्हें व्यंजन कहते हैं। परम्परागत रूप से व्यंजनों की संख्या ‘33’ मानी जाती है। Consonant का हिन्दी अर्थ ‘व्यंजन’ होता है और यह Consonant अर्थात् व्यंजन एक प्रकार की Noun होती है जिसका प्रयोग वाक्य बनाने के लिए करते हैं इस तरह से व्यंजन स्वर का ही स्वरूप है। साधारण बोलचाल की भाषा में ‘क’ से ‘ज्ञ’ तक वर्णों को उपयोग में लाया जाता है, उन सभी वर्णों को व्यंजन कहते हैं। साधारणतय: व्यंजन की संख्या ‘33’ मानी जाती है परन्तु चार संयुक्त व्यंजन और दो द्विगुण व्यंजन को साधारण व्यंजन से मिलाने के बाद कुल व्यंजनों की संख्या 39 मानी गई है।
D. हिन्दी व्याकरण में व्यंजन का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, व्यंजन से ही हिन्दी वर्णमाला तैयार होती है व्यंजन के कारण ही इस भाषा को लिखना पढ़ना आसान होता हैं स्वरों की सहयाता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं। जिन ध्वनियों का उच्चारण करते समय श्वास मुख के किसी स्थान विशेष (तालु, मूर्धा, ओष्ठ या दाँत) आदि का स्पर्श करते हुए निकले उन्हें व्यंजन कहते हैं। परम्परागत रूप से व्यंजनों की संख्या ‘33’ मानी जाती है। Consonant का हिन्दी अर्थ ‘व्यंजन’ होता है और यह Consonant अर्थात् व्यंजन एक प्रकार की Noun होती है जिसका प्रयोग वाक्य बनाने के लिए करते हैं इस तरह से व्यंजन स्वर का ही स्वरूप है। साधारण बोलचाल की भाषा में ‘क’ से ‘ज्ञ’ तक वर्णों को उपयोग में लाया जाता है, उन सभी वर्णों को व्यंजन कहते हैं। साधारणतय: व्यंजन की संख्या ‘33’ मानी जाती है परन्तु चार संयुक्त व्यंजन और दो द्विगुण व्यंजन को साधारण व्यंजन से मिलाने के बाद कुल व्यंजनों की संख्या 39 मानी गई है।