Correct Answer:
Option A - विषम जालिकता सर्वप्रथम म्यूकर में ज्ञात हुई थी। सर्वप्रथम ब्लैकस्ली (Blakeslee) ने 1904 में म्यूकोरेल्सगण में लैंगिक जनन का अध्ययन करते समय विषमजालिकता का पता लगाया था। ऐसे कवक जिनमें दो विभिन्न स्ट्रेन वाले माइसीलियम एक-दूसरे के सम्पर्क में आने पर लैंगिक जनन होता है। इसमें एक प्लस स्टेन (plus strain) दूसरा माइनस स्ट्रेन (minus strain) का होता है। बाह्य रूप से ये देखने में एक समान प्रतीत होते हैं परन्तु वास्तव में शरीर क्रियात्मक रूप से भिन्न होते हैं। ऐसे कवकों को विषम जालिक (Heterothallic) तथा घटना को विषमजालिकता (Heterothallism) कहते हैं। प्लस स्ट्रेन वाले कवक तन्तु मादा स्ट्रेन तथा माइनस स्ट्रेन वाले तन्तु को नर स्ट्रेन कहा जाता है।
A. विषम जालिकता सर्वप्रथम म्यूकर में ज्ञात हुई थी। सर्वप्रथम ब्लैकस्ली (Blakeslee) ने 1904 में म्यूकोरेल्सगण में लैंगिक जनन का अध्ययन करते समय विषमजालिकता का पता लगाया था। ऐसे कवक जिनमें दो विभिन्न स्ट्रेन वाले माइसीलियम एक-दूसरे के सम्पर्क में आने पर लैंगिक जनन होता है। इसमें एक प्लस स्टेन (plus strain) दूसरा माइनस स्ट्रेन (minus strain) का होता है। बाह्य रूप से ये देखने में एक समान प्रतीत होते हैं परन्तु वास्तव में शरीर क्रियात्मक रूप से भिन्न होते हैं। ऐसे कवकों को विषम जालिक (Heterothallic) तथा घटना को विषमजालिकता (Heterothallism) कहते हैं। प्लस स्ट्रेन वाले कवक तन्तु मादा स्ट्रेन तथा माइनस स्ट्रेन वाले तन्तु को नर स्ट्रेन कहा जाता है।