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Q: ‘अविगणय्य’ इति पदे प्रयुक्तं कृदन्तप्रत्ययं चित्वा लिखत-
  • A. शतृ
  • B. क्त्वा
  • C. शानच्
  • D. ल्यप्
Correct Answer: Option D - ‘‘अविगणस्य’’ इति प्दो प्रयुक्तं ल्यप् कृदन्त प्रत्ययं अस्ति। ‘अविगणस्य’ इस पद में प्रयुक्त ल्यप् कृदन्त प्रव्यय है। कर या करके अर्थ में क्त्वा और ल्यप् प्रत्यय होते हैं, क्त्वा का त्वा और ल्यप् का ‘य’ शेष रहता है। धातु से पहले उपसर्ग नहीं होगा तो क्त्वा होगा। यदि उपसर्ग पहले होगा तो ल्यप् होगा। दो प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं। अत: इनके रूप नहीं चलते।
D. ‘‘अविगणस्य’’ इति प्दो प्रयुक्तं ल्यप् कृदन्त प्रत्ययं अस्ति। ‘अविगणस्य’ इस पद में प्रयुक्त ल्यप् कृदन्त प्रव्यय है। कर या करके अर्थ में क्त्वा और ल्यप् प्रत्यय होते हैं, क्त्वा का त्वा और ल्यप् का ‘य’ शेष रहता है। धातु से पहले उपसर्ग नहीं होगा तो क्त्वा होगा। यदि उपसर्ग पहले होगा तो ल्यप् होगा। दो प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं। अत: इनके रूप नहीं चलते।
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‘‘अविगणस्य’’ इति प्दो प्रयुक्तं ल्यप् कृदन्त प्रत्ययं अस्ति। ‘अविगणस्य’ इस पद में प्रयुक्त ल्यप् कृदन्त प्रव्यय है। कर या करके अर्थ में क्त्वा और ल्यप् प्रत्यय होते हैं, क्त्वा का त्वा और ल्यप् का ‘य’ शेष रहता है। धातु से पहले उपसर्ग नहीं होगा तो क्त्वा होगा। यदि उपसर्ग पहले होगा तो ल्यप् होगा। दो प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं। अत: इनके रूप नहीं चलते।
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