Correct Answer:
Option A - प्राथमिक स्तर पर ‘गणित प्रत्यक्ष है और कल्पना की आवश्यकता नहीं है।’ ये कथन गणित की प्रकृति के बारे में सत्य नहीं हैं क्योंकि गणित में ज्ञान ठीक, स्पष्ट एवं तार्किक क्रम में होता है।
गणित की प्रकृति को दर्शन के आधार पर निम्न प्रकार से समझा जा सकता है –
• गणित संख्याओं, स्थान और मापन आदि का अध्ययन है।
• गणित अमूर्त प्रत्ययों को समझने में सहायता करता है।
• गणित के ज्ञान से वस्तुस्थिति स्पष्ट होती है।
• गणित में विचारों के सही संचारण के लिए विशेष शब्दावली का प्रयोग होता है।
• गणितीय ज्ञान की संरचना में तर्क कौशल महत्वपूर्ण है।
• गणितीय संकल्पनाओं की प्रकृति श्रेणीबद्ध है।
A. प्राथमिक स्तर पर ‘गणित प्रत्यक्ष है और कल्पना की आवश्यकता नहीं है।’ ये कथन गणित की प्रकृति के बारे में सत्य नहीं हैं क्योंकि गणित में ज्ञान ठीक, स्पष्ट एवं तार्किक क्रम में होता है।
गणित की प्रकृति को दर्शन के आधार पर निम्न प्रकार से समझा जा सकता है –
• गणित संख्याओं, स्थान और मापन आदि का अध्ययन है।
• गणित अमूर्त प्रत्ययों को समझने में सहायता करता है।
• गणित के ज्ञान से वस्तुस्थिति स्पष्ट होती है।
• गणित में विचारों के सही संचारण के लिए विशेष शब्दावली का प्रयोग होता है।
• गणितीय ज्ञान की संरचना में तर्क कौशल महत्वपूर्ण है।
• गणितीय संकल्पनाओं की प्रकृति श्रेणीबद्ध है।