Correct Answer:
Option C - हृदय में मूल रूप से विद्यमान रहने वाले भावों को ‘स्थायी भाव’ की संज्ञा दी जाती है।
सर्वप्रथम आचार्य भरतमुनि ने 8 स्थायी भावों की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य ‘मम्मट’ और ‘अभिनव गुप्त’ ने रसों की संख्या 9 मानी है। आचार्य उद्भट ने ‘निर्वेद’ को भी स्थायीभावों का एक भेद माना है। अत: इस कारण से स्थायीभावों की कुल संख्या 9 मानी जाती है।
रस स्थायी भाव रस स्थायी भाव
शृंगार रस - रति हास्य रस - हास
रौद्र रस - क्रोध करुण रस - शोक
वीभत्स रस - जुगुप्सा भयानक रस - भय
वीर रस - उत्साह अद्भुत रस - विस्मय
शांत रस - निर्वेद
C. हृदय में मूल रूप से विद्यमान रहने वाले भावों को ‘स्थायी भाव’ की संज्ञा दी जाती है।
सर्वप्रथम आचार्य भरतमुनि ने 8 स्थायी भावों की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य ‘मम्मट’ और ‘अभिनव गुप्त’ ने रसों की संख्या 9 मानी है। आचार्य उद्भट ने ‘निर्वेद’ को भी स्थायीभावों का एक भेद माना है। अत: इस कारण से स्थायीभावों की कुल संख्या 9 मानी जाती है।
रस स्थायी भाव रस स्थायी भाव
शृंगार रस - रति हास्य रस - हास
रौद्र रस - क्रोध करुण रस - शोक
वीभत्स रस - जुगुप्सा भयानक रस - भय
वीर रस - उत्साह अद्भुत रस - विस्मय
शांत रस - निर्वेद