Correct Answer:
Option D - ‘विवृत स्वर’ जीभ के भाग के आधार पर हिन्दी स्वरों के अन्तर्गत नहीं आता है। जिह्वा के उत्थापित होने या उसकी क्रियाशीलता के आधार पर स्वर तीन प्रकर के होते हैं।
(1) अग्र स्वर (2) मध्य स्वर (3 ) पश्च स्वर।
विवृत स्वर वे स्वर हैं जिनके उच्चारण में मुख द्वार पूरा खुलता है।
जैसे- आ।
मुख द्वार के खुलने के आधार पर स्वर चार प्रकार के होते हैं–
(1) विवृत (2) अर्ध विवृत (3) अर्ध संवृत (4) संवृत।
D. ‘विवृत स्वर’ जीभ के भाग के आधार पर हिन्दी स्वरों के अन्तर्गत नहीं आता है। जिह्वा के उत्थापित होने या उसकी क्रियाशीलता के आधार पर स्वर तीन प्रकर के होते हैं।
(1) अग्र स्वर (2) मध्य स्वर (3 ) पश्च स्वर।
विवृत स्वर वे स्वर हैं जिनके उच्चारण में मुख द्वार पूरा खुलता है।
जैसे- आ।
मुख द्वार के खुलने के आधार पर स्वर चार प्रकार के होते हैं–
(1) विवृत (2) अर्ध विवृत (3) अर्ध संवृत (4) संवृत।