Correct Answer:
Option A - ‘हेतौ’ इति सूत्रस्योदाहरणमस्ति- ‘पुण्येन दृष्टो हरि:।
‘हेतौ’- हेतु अर्थात् करण बोधक शब्दों में तृतीया होती है।
यथा- पुण्येन दृष्टो हरि:।
विद्यया यशो लभते।।
हेतु और करण में यह भेद होता है कि करण केवल क्रिया का साधक होता है परन्तु हेतु द्रव्य, गुण और क्रिया का भी साधक हो सकता है। इसके अतिरिक्त करण सदा व्यापार युक्त होता है परन्तु हेतु व्यापार रहित या व्यापार सहित दोनों प्रकार का हो सकता है।
A. ‘हेतौ’ इति सूत्रस्योदाहरणमस्ति- ‘पुण्येन दृष्टो हरि:।
‘हेतौ’- हेतु अर्थात् करण बोधक शब्दों में तृतीया होती है।
यथा- पुण्येन दृष्टो हरि:।
विद्यया यशो लभते।।
हेतु और करण में यह भेद होता है कि करण केवल क्रिया का साधक होता है परन्तु हेतु द्रव्य, गुण और क्रिया का भी साधक हो सकता है। इसके अतिरिक्त करण सदा व्यापार युक्त होता है परन्तु हेतु व्यापार रहित या व्यापार सहित दोनों प्रकार का हो सकता है।