Correct Answer:
Option D - ‘हिंदी निबन्ध’ से संदर्भित मंतव्यों में से आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के कथन निम्नलिखित हैं-
● आधुनिक पाश्चात्य लक्षणों के अनुसार निबन्ध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात् व्यक्तिगत विशेषता हो।
● संसार की हर बात और सब बातों से सम्बद्ध है, अपने मानसिक संघटन के अनुसार किसी का मन किसी संबंधसूत्र पर दौड़ता है, किसी का किसी पर।
● तत्वचिन्तक या वैज्ञानिक से निबंध लेखक की भिन्नता इस बात से भी है कि निबंध लेखक जिधर चलता है उधर अपनी संपूर्ण मानसिक सत्ता के साथ अर्थात बुद्धि और भावात्मक हृदय दोनों लिए हुए।
आ. रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा है,- ‘‘यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबन्ध गद्य की कसौटी है। भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबन्धों में ही सबसे अधिक संभव है।’’ श्रद्धा और भक्ति, लज्जा और ग्लानि, तुलसी का भक्तिमार्ग, मानस की धर्मभूमि, कविता क्या है, काव्य में रहस्यवाद आ. शुक्ल के प्रमुख निबंध हैं।
D. ‘हिंदी निबन्ध’ से संदर्भित मंतव्यों में से आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के कथन निम्नलिखित हैं-
● आधुनिक पाश्चात्य लक्षणों के अनुसार निबन्ध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात् व्यक्तिगत विशेषता हो।
● संसार की हर बात और सब बातों से सम्बद्ध है, अपने मानसिक संघटन के अनुसार किसी का मन किसी संबंधसूत्र पर दौड़ता है, किसी का किसी पर।
● तत्वचिन्तक या वैज्ञानिक से निबंध लेखक की भिन्नता इस बात से भी है कि निबंध लेखक जिधर चलता है उधर अपनी संपूर्ण मानसिक सत्ता के साथ अर्थात बुद्धि और भावात्मक हृदय दोनों लिए हुए।
आ. रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा है,- ‘‘यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबन्ध गद्य की कसौटी है। भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबन्धों में ही सबसे अधिक संभव है।’’ श्रद्धा और भक्ति, लज्जा और ग्लानि, तुलसी का भक्तिमार्ग, मानस की धर्मभूमि, कविता क्या है, काव्य में रहस्यवाद आ. शुक्ल के प्रमुख निबंध हैं।