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Q: हिन्दू मग पर पांव न राखेउ ।। का बहुतैं जो हिन्दी भाखेउ ।। ये काव्य पंक्तियाँ किस बोली में हैं?
  • A. ब्रज
  • B. भोजपुरी
  • C. अवधी
  • D. बुंदेली
Correct Answer: Option C - प्रश्नोक्त पंक्तियाँ अवधी बोली में रचित हैं। ये पंक्तियाँ प्रेमाश्रयी धारा के सूफी कवि नूर मुहम्मद द्वारा रचित ‘अनुराग बाँसुरी’ से उद्धृत है। ध्यातव्य हो कि अवधी बोली सूफी प्रेमाख्यानक काव्य की प्रमुख भाषा थी। वैसे तो राजस्थानी एवं ब्रजभाषा में भी सूफी प्रेमाख्यानक ग्रंथ रचे गये परन्तु सर्वाधिक प्रसिद्धि एवं सर्वाधिक संख्या अवधी में रचित ग्रंथों की ही है।
C. प्रश्नोक्त पंक्तियाँ अवधी बोली में रचित हैं। ये पंक्तियाँ प्रेमाश्रयी धारा के सूफी कवि नूर मुहम्मद द्वारा रचित ‘अनुराग बाँसुरी’ से उद्धृत है। ध्यातव्य हो कि अवधी बोली सूफी प्रेमाख्यानक काव्य की प्रमुख भाषा थी। वैसे तो राजस्थानी एवं ब्रजभाषा में भी सूफी प्रेमाख्यानक ग्रंथ रचे गये परन्तु सर्वाधिक प्रसिद्धि एवं सर्वाधिक संख्या अवधी में रचित ग्रंथों की ही है।

Explanations:

प्रश्नोक्त पंक्तियाँ अवधी बोली में रचित हैं। ये पंक्तियाँ प्रेमाश्रयी धारा के सूफी कवि नूर मुहम्मद द्वारा रचित ‘अनुराग बाँसुरी’ से उद्धृत है। ध्यातव्य हो कि अवधी बोली सूफी प्रेमाख्यानक काव्य की प्रमुख भाषा थी। वैसे तो राजस्थानी एवं ब्रजभाषा में भी सूफी प्रेमाख्यानक ग्रंथ रचे गये परन्तु सर्वाधिक प्रसिद्धि एवं सर्वाधिक संख्या अवधी में रचित ग्रंथों की ही है।