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Q: ‘‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती............’’ –यह उक्ति किस रचनाकार की है?
  • A. जयशंकर प्रसाद
  • B. भारतेंदु हरिश्चंद्र
  • C. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  • D. अज्ञेय
Correct Answer: Option A - ‘‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती.........’’ यह उक्ति जयशंकर प्रसाद की है। प्र्रस्तुत उक्ति जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक ‘चन्द्रगुप्त’ के चौथे अंक के छठे दृश्य से लिया गया है, जो इस नाटक का अंतिम अंश है। प्रसाद के प्रमुख नाटक–सज्जन, कल्याणी परिणय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कन्दगुप्त, एक घूँट, चन्द्रगुप्त, धु्रवस्वामिनी, है।
A. ‘‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती.........’’ यह उक्ति जयशंकर प्रसाद की है। प्र्रस्तुत उक्ति जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक ‘चन्द्रगुप्त’ के चौथे अंक के छठे दृश्य से लिया गया है, जो इस नाटक का अंतिम अंश है। प्रसाद के प्रमुख नाटक–सज्जन, कल्याणी परिणय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कन्दगुप्त, एक घूँट, चन्द्रगुप्त, धु्रवस्वामिनी, है।

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‘‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती.........’’ यह उक्ति जयशंकर प्रसाद की है। प्र्रस्तुत उक्ति जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक ‘चन्द्रगुप्त’ के चौथे अंक के छठे दृश्य से लिया गया है, जो इस नाटक का अंतिम अंश है। प्रसाद के प्रमुख नाटक–सज्जन, कल्याणी परिणय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कन्दगुप्त, एक घूँट, चन्द्रगुप्त, धु्रवस्वामिनी, है।