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Q: घन आनंद किस काल के कवि हैं?
  • A. रीतिकाल
  • B. भक्तिकाल
  • C. आदिकाल
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - घन आनन्द रीतिकाल के कवि है। ⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद के मीर मुंशी थे और निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे। ⇒ बङ्कानाथ ने घनानंद की रचनाओं का सर्वप्रथम संकलन किया। ⇒ भारतेन्द्र ने घनानंद की रचनाओं का संग्रह ‘सुंदरी तिलक’ नाम से प्रकाशित कराया था। ⇒ जगन्नाथ दास रत्नाकर ने ‘1954 ई. में’ ‘सुजान सागर’ नाम से इनकी रचनाओं का संग्रह प्रकाशित करवाया। ⇒ आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने घनानंद की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह ‘घनानंद ग्रंथावली’ शीर्षक से किया इसमें कुल 502 छंद है। ⇒ घनानंद की रचनाएँ-वियोगवेली, इश्कलता प्रीतिपावस, प्रेमपत्रिका, कृष्णकौमुदी, कृपाकंद, प्रिया प्रसाद, व्रजव्यवहार, गिरिगाथा, भावनाप्रकाश, नाममाधुरी, बिरहलाला, बिरहलीला, कोफसार, यमुनायश, रसकेति वल्ली इत्यादि है।
A. घन आनन्द रीतिकाल के कवि है। ⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद के मीर मुंशी थे और निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे। ⇒ बङ्कानाथ ने घनानंद की रचनाओं का सर्वप्रथम संकलन किया। ⇒ भारतेन्द्र ने घनानंद की रचनाओं का संग्रह ‘सुंदरी तिलक’ नाम से प्रकाशित कराया था। ⇒ जगन्नाथ दास रत्नाकर ने ‘1954 ई. में’ ‘सुजान सागर’ नाम से इनकी रचनाओं का संग्रह प्रकाशित करवाया। ⇒ आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने घनानंद की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह ‘घनानंद ग्रंथावली’ शीर्षक से किया इसमें कुल 502 छंद है। ⇒ घनानंद की रचनाएँ-वियोगवेली, इश्कलता प्रीतिपावस, प्रेमपत्रिका, कृष्णकौमुदी, कृपाकंद, प्रिया प्रसाद, व्रजव्यवहार, गिरिगाथा, भावनाप्रकाश, नाममाधुरी, बिरहलाला, बिरहलीला, कोफसार, यमुनायश, रसकेति वल्ली इत्यादि है।

Explanations:

घन आनन्द रीतिकाल के कवि है। ⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद के मीर मुंशी थे और निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे। ⇒ बङ्कानाथ ने घनानंद की रचनाओं का सर्वप्रथम संकलन किया। ⇒ भारतेन्द्र ने घनानंद की रचनाओं का संग्रह ‘सुंदरी तिलक’ नाम से प्रकाशित कराया था। ⇒ जगन्नाथ दास रत्नाकर ने ‘1954 ई. में’ ‘सुजान सागर’ नाम से इनकी रचनाओं का संग्रह प्रकाशित करवाया। ⇒ आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने घनानंद की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह ‘घनानंद ग्रंथावली’ शीर्षक से किया इसमें कुल 502 छंद है। ⇒ घनानंद की रचनाएँ-वियोगवेली, इश्कलता प्रीतिपावस, प्रेमपत्रिका, कृष्णकौमुदी, कृपाकंद, प्रिया प्रसाद, व्रजव्यवहार, गिरिगाथा, भावनाप्रकाश, नाममाधुरी, बिरहलाला, बिरहलीला, कोफसार, यमुनायश, रसकेति वल्ली इत्यादि है।