Correct Answer:
Option A - घन आनन्द रीतिकाल के कवि है।
⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद के मीर मुंशी थे और निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे।
⇒ बङ्कानाथ ने घनानंद की रचनाओं का सर्वप्रथम संकलन किया।
⇒ भारतेन्द्र ने घनानंद की रचनाओं का संग्रह ‘सुंदरी तिलक’ नाम से प्रकाशित कराया था।
⇒ जगन्नाथ दास रत्नाकर ने ‘1954 ई. में’ ‘सुजान सागर’ नाम से इनकी रचनाओं का संग्रह प्रकाशित करवाया।
⇒ आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने घनानंद की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह ‘घनानंद ग्रंथावली’ शीर्षक से किया इसमें कुल 502 छंद है।
⇒ घनानंद की रचनाएँ-वियोगवेली, इश्कलता प्रीतिपावस, प्रेमपत्रिका, कृष्णकौमुदी, कृपाकंद, प्रिया प्रसाद, व्रजव्यवहार, गिरिगाथा, भावनाप्रकाश, नाममाधुरी, बिरहलाला, बिरहलीला, कोफसार, यमुनायश, रसकेति वल्ली इत्यादि है।
A. घन आनन्द रीतिकाल के कवि है।
⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद के मीर मुंशी थे और निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे।
⇒ बङ्कानाथ ने घनानंद की रचनाओं का सर्वप्रथम संकलन किया।
⇒ भारतेन्द्र ने घनानंद की रचनाओं का संग्रह ‘सुंदरी तिलक’ नाम से प्रकाशित कराया था।
⇒ जगन्नाथ दास रत्नाकर ने ‘1954 ई. में’ ‘सुजान सागर’ नाम से इनकी रचनाओं का संग्रह प्रकाशित करवाया।
⇒ आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने घनानंद की संपूर्ण रचनाओं का संग्रह ‘घनानंद ग्रंथावली’ शीर्षक से किया इसमें कुल 502 छंद है।
⇒ घनानंद की रचनाएँ-वियोगवेली, इश्कलता प्रीतिपावस, प्रेमपत्रिका, कृष्णकौमुदी, कृपाकंद, प्रिया प्रसाद, व्रजव्यवहार, गिरिगाथा, भावनाप्रकाश, नाममाधुरी, बिरहलाला, बिरहलीला, कोफसार, यमुनायश, रसकेति वल्ली इत्यादि है।