Correct Answer:
Option A - उत्तररामचरितम् नाटक का मुख्य रस करुण है। करुण का स्थायी भाव शोक है इसका लक्षण इस प्रकार है - ‘इष्टनाशादिभिश्चेतो वैक्लव्यं शोक शब्दभाक्' अर्थात् प्रिय के नाशादि के कारण चित्त का व्याकुल होना `शोक' कहलाता है। इस नाटक में वैदर्भी एवं गौड़ी रीति का मणिकाञ्चन संयोग है।
A. उत्तररामचरितम् नाटक का मुख्य रस करुण है। करुण का स्थायी भाव शोक है इसका लक्षण इस प्रकार है - ‘इष्टनाशादिभिश्चेतो वैक्लव्यं शोक शब्दभाक्' अर्थात् प्रिय के नाशादि के कारण चित्त का व्याकुल होना `शोक' कहलाता है। इस नाटक में वैदर्भी एवं गौड़ी रीति का मणिकाञ्चन संयोग है।