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Q: Given below are two statements: नीचे दो कथन दिए गए हैं– Statement I: ‘‘Bhartiya Rashtriya Samajik Sammelan’’ was founded by Swami Dayanand Saraswati in 1883. कथन I : ``भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन'' की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1883 में की थी। Statement II: ‘Veda Samaj’ was established in 1867 at Karnataka. कथन II: `वेद समाज' की स्थापना कर्नाटक में 1867 में हुई थी। In the light of the above statement, choose the most appropriate answer from the options given below: उपरिलिखित कथनों के आधार पर नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उचित उत्तर का चुनाव कीजिए–
  • A. Both Statement I and Statement II are correct./कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
  • B. Statement I is correct and Statement II is incorrect./कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
  • C. Statement I is correct and Statement II is incorrect./कथन I सही है और कथन II गलत है।
  • D. Statement I is incorrect and Statement II is correct. ./कथन I गलत है और कथन II सही है।
Correct Answer: Option B - महादेव गोविन्द रानाडे (1842-1901 ई.) को पश्चिमी भारत के पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। रानाडे ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ की स्थापना 1887 ई. में रघुनाथ राव के सहयोग से किया। इस संगठन का अधिवेशन बहुत वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ-साथ होता रहा। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बहुविवाह, बाल विवाह तथा कुलीन वाद जैसी कुप्रथाओं का परित्याग करना था। रानाडे ने ही महाराष्ट्र में ‘विडो रिमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से दक्कन एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना हुआ। प्रार्थना समाज की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रानाडे को है। रानाडे वर्ष 1887 ई. में स्थापित प्रार्थना समाज में दो वर्ष पश्चात सम्मिलित हुए। इन्हें ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ भी कहा जाता है। पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना अप्रैल 1870 ई. एम.जी. रानाडे एवं जी.वी. जोशी ने पूना में की थी। 1864 ई. में वेद समाज की स्थापना मद्रास में हुई तथा इसका पुनर्गठन 1871 ई. में के.के. श्रीधरलू नायडू ने ‘ब्रह्म समाज ऑफ साउथ इण्डिया’ के नाम से किया। वेद समाज ने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों को एक नई दिशा प्रदान की।
B. महादेव गोविन्द रानाडे (1842-1901 ई.) को पश्चिमी भारत के पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। रानाडे ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ की स्थापना 1887 ई. में रघुनाथ राव के सहयोग से किया। इस संगठन का अधिवेशन बहुत वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ-साथ होता रहा। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बहुविवाह, बाल विवाह तथा कुलीन वाद जैसी कुप्रथाओं का परित्याग करना था। रानाडे ने ही महाराष्ट्र में ‘विडो रिमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से दक्कन एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना हुआ। प्रार्थना समाज की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रानाडे को है। रानाडे वर्ष 1887 ई. में स्थापित प्रार्थना समाज में दो वर्ष पश्चात सम्मिलित हुए। इन्हें ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ भी कहा जाता है। पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना अप्रैल 1870 ई. एम.जी. रानाडे एवं जी.वी. जोशी ने पूना में की थी। 1864 ई. में वेद समाज की स्थापना मद्रास में हुई तथा इसका पुनर्गठन 1871 ई. में के.के. श्रीधरलू नायडू ने ‘ब्रह्म समाज ऑफ साउथ इण्डिया’ के नाम से किया। वेद समाज ने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों को एक नई दिशा प्रदान की।

Explanations:

महादेव गोविन्द रानाडे (1842-1901 ई.) को पश्चिमी भारत के पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। रानाडे ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ की स्थापना 1887 ई. में रघुनाथ राव के सहयोग से किया। इस संगठन का अधिवेशन बहुत वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ-साथ होता रहा। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बहुविवाह, बाल विवाह तथा कुलीन वाद जैसी कुप्रथाओं का परित्याग करना था। रानाडे ने ही महाराष्ट्र में ‘विडो रिमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से दक्कन एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना हुआ। प्रार्थना समाज की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रानाडे को है। रानाडे वर्ष 1887 ई. में स्थापित प्रार्थना समाज में दो वर्ष पश्चात सम्मिलित हुए। इन्हें ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ भी कहा जाता है। पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना अप्रैल 1870 ई. एम.जी. रानाडे एवं जी.वी. जोशी ने पूना में की थी। 1864 ई. में वेद समाज की स्थापना मद्रास में हुई तथा इसका पुनर्गठन 1871 ई. में के.के. श्रीधरलू नायडू ने ‘ब्रह्म समाज ऑफ साउथ इण्डिया’ के नाम से किया। वेद समाज ने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों को एक नई दिशा प्रदान की।