Correct Answer:
Option B - महादेव गोविन्द रानाडे (1842-1901 ई.) को पश्चिमी भारत के पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। रानाडे ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ की स्थापना 1887 ई. में रघुनाथ राव के सहयोग से किया। इस संगठन का अधिवेशन बहुत वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ-साथ होता रहा। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बहुविवाह, बाल विवाह तथा कुलीन वाद जैसी कुप्रथाओं का परित्याग करना था। रानाडे ने ही महाराष्ट्र में ‘विडो रिमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से दक्कन एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना हुआ। प्रार्थना समाज की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रानाडे को है। रानाडे वर्ष 1887 ई. में स्थापित प्रार्थना समाज में दो वर्ष पश्चात सम्मिलित हुए। इन्हें ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ भी कहा जाता है। पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना अप्रैल 1870 ई. एम.जी. रानाडे एवं जी.वी. जोशी ने पूना में की थी। 1864 ई. में वेद समाज की स्थापना मद्रास में हुई तथा इसका पुनर्गठन 1871 ई. में के.के. श्रीधरलू नायडू ने ‘ब्रह्म समाज ऑफ साउथ इण्डिया’ के नाम से किया। वेद समाज ने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों को एक नई दिशा प्रदान की।
B. महादेव गोविन्द रानाडे (1842-1901 ई.) को पश्चिमी भारत के पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। रानाडे ने ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ की स्थापना 1887 ई. में रघुनाथ राव के सहयोग से किया। इस संगठन का अधिवेशन बहुत वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ-साथ होता रहा। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य बहुविवाह, बाल विवाह तथा कुलीन वाद जैसी कुप्रथाओं का परित्याग करना था। रानाडे ने ही महाराष्ट्र में ‘विडो रिमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से दक्कन एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना हुआ। प्रार्थना समाज की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रानाडे को है। रानाडे वर्ष 1887 ई. में स्थापित प्रार्थना समाज में दो वर्ष पश्चात सम्मिलित हुए। इन्हें ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ भी कहा जाता है। पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना अप्रैल 1870 ई. एम.जी. रानाडे एवं जी.वी. जोशी ने पूना में की थी। 1864 ई. में वेद समाज की स्थापना मद्रास में हुई तथा इसका पुनर्गठन 1871 ई. में के.के. श्रीधरलू नायडू ने ‘ब्रह्म समाज ऑफ साउथ इण्डिया’ के नाम से किया। वेद समाज ने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों को एक नई दिशा प्रदान की।