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Q: घटे जलं सम्पूर्य प्रेमल: किम् अकुर्वत् ?
  • A. प्रेमल: काष्ठानि प्रज्वालयत्
  • B. प्रेमलीवचनात् स गृहाद् बहिरगच्छत्
  • C. जलंआनेतुं प्रेमल: पुन: कूपम् अगच्छत्
  • D. हण्डीं प्रेमल: यथास्थानं स्थापितवान्
Correct Answer: Option A - घटे जलं सम्पूर्य प्रेमल: काष्ठानि प्रज्वालयत्। घड़े में जल को भरकर प्रेमल लकड़ी को जलाता है। प्रेमली बोली-तुम आज चूल्हे में लकड़ी जालओ, प्रेमल लकड़ी जलाकर पूछता है, आगे क्या करू? प्रेमली कहती है– जब तक चूल्हे में सही से आग नहीं जलती तब तक फूक मारो । प्रेमल के द्वारा चूल्हा सही से जलाने के बाद फिर पूछता है, अब क्या करू? प्रेमली कहती है। घाट से हाण्डी में जल लाओ । तब हण्डी को चूल्हे के ऊपर रख दो।
A. घटे जलं सम्पूर्य प्रेमल: काष्ठानि प्रज्वालयत्। घड़े में जल को भरकर प्रेमल लकड़ी को जलाता है। प्रेमली बोली-तुम आज चूल्हे में लकड़ी जालओ, प्रेमल लकड़ी जलाकर पूछता है, आगे क्या करू? प्रेमली कहती है– जब तक चूल्हे में सही से आग नहीं जलती तब तक फूक मारो । प्रेमल के द्वारा चूल्हा सही से जलाने के बाद फिर पूछता है, अब क्या करू? प्रेमली कहती है। घाट से हाण्डी में जल लाओ । तब हण्डी को चूल्हे के ऊपर रख दो।

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घटे जलं सम्पूर्य प्रेमल: काष्ठानि प्रज्वालयत्। घड़े में जल को भरकर प्रेमल लकड़ी को जलाता है। प्रेमली बोली-तुम आज चूल्हे में लकड़ी जालओ, प्रेमल लकड़ी जलाकर पूछता है, आगे क्या करू? प्रेमली कहती है– जब तक चूल्हे में सही से आग नहीं जलती तब तक फूक मारो । प्रेमल के द्वारा चूल्हा सही से जलाने के बाद फिर पूछता है, अब क्या करू? प्रेमली कहती है। घाट से हाण्डी में जल लाओ । तब हण्डी को चूल्हे के ऊपर रख दो।