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Q: .
  • A. रामचन्द्र शुक्ल
  • B. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
  • C. हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • D. महावीर प्रसाद द्विवेदी
Correct Answer: Option B - ‘‘उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिन्दी है’’, यह कथन चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का हैं। ⇒ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने सन् 1921 की नागरी प्रचारिणी पत्रिका में ‘पुरानी हिन्दी’ शीर्षक से एक लेखमाला की शुरूआत की। इसमें उन्होंने लिखा है- ‘‘विक्रम की 7वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक अपभ्रंश की प्रधानता रही और फिर वह पुरानी हिन्दी में परिणत हो गई।’’ ⇒ गुलेरी जी अपभ्रंश को स्पष्टत: दो भागों में बाँट देते है- पुरानी अपभ्रंश और परवर्ती अपभ्रंश। बाद में चलकर इस परवर्ती अपभ्रंश को हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्मिलित किया जाने लगा।
B. ‘‘उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिन्दी है’’, यह कथन चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का हैं। ⇒ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने सन् 1921 की नागरी प्रचारिणी पत्रिका में ‘पुरानी हिन्दी’ शीर्षक से एक लेखमाला की शुरूआत की। इसमें उन्होंने लिखा है- ‘‘विक्रम की 7वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक अपभ्रंश की प्रधानता रही और फिर वह पुरानी हिन्दी में परिणत हो गई।’’ ⇒ गुलेरी जी अपभ्रंश को स्पष्टत: दो भागों में बाँट देते है- पुरानी अपभ्रंश और परवर्ती अपभ्रंश। बाद में चलकर इस परवर्ती अपभ्रंश को हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्मिलित किया जाने लगा।

Explanations:

‘‘उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिन्दी है’’, यह कथन चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का हैं। ⇒ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने सन् 1921 की नागरी प्रचारिणी पत्रिका में ‘पुरानी हिन्दी’ शीर्षक से एक लेखमाला की शुरूआत की। इसमें उन्होंने लिखा है- ‘‘विक्रम की 7वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक अपभ्रंश की प्रधानता रही और फिर वह पुरानी हिन्दी में परिणत हो गई।’’ ⇒ गुलेरी जी अपभ्रंश को स्पष्टत: दो भागों में बाँट देते है- पुरानी अपभ्रंश और परवर्ती अपभ्रंश। बाद में चलकर इस परवर्ती अपभ्रंश को हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्मिलित किया जाने लगा।