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Q: Generally while chaining, the arrows which accompany with one chain must be
  • A. 12 nos/12 संख्या
  • B. 10 nos/10 संख्या
  • C. 5 nos/5 संख्या
  • D. 3 nos/3 संख्या
Correct Answer: Option B - IS : 1842–1961 के अनुसार सुआ 4 मिमी. मोटा इस्पातीय तार का बना जिसकी लम्बाई 40 मिमी. होता है जिसका एक सिरा नुकीला होता है। जमीन मापन कार्य में सुओं की गिनती पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जितने सुए अगुआ चैन फैलाकर जमीन में गाड़ता है उतने ही सूए उखाड़ने के बाद अनुचर के पास होने चाहिए।संख्या में अन्तर आ जाने पर, जरीब कार्य की लम्बाई में त्रुटि होती है, अत: भूल-चूक से बचने के लिए चेन के साथ सुओं की सख्या (10 सुए) निर्धारित कर दी गई है।
B. IS : 1842–1961 के अनुसार सुआ 4 मिमी. मोटा इस्पातीय तार का बना जिसकी लम्बाई 40 मिमी. होता है जिसका एक सिरा नुकीला होता है। जमीन मापन कार्य में सुओं की गिनती पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जितने सुए अगुआ चैन फैलाकर जमीन में गाड़ता है उतने ही सूए उखाड़ने के बाद अनुचर के पास होने चाहिए।संख्या में अन्तर आ जाने पर, जरीब कार्य की लम्बाई में त्रुटि होती है, अत: भूल-चूक से बचने के लिए चेन के साथ सुओं की सख्या (10 सुए) निर्धारित कर दी गई है।

Explanations:

IS : 1842–1961 के अनुसार सुआ 4 मिमी. मोटा इस्पातीय तार का बना जिसकी लम्बाई 40 मिमी. होता है जिसका एक सिरा नुकीला होता है। जमीन मापन कार्य में सुओं की गिनती पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जितने सुए अगुआ चैन फैलाकर जमीन में गाड़ता है उतने ही सूए उखाड़ने के बाद अनुचर के पास होने चाहिए।संख्या में अन्तर आ जाने पर, जरीब कार्य की लम्बाई में त्रुटि होती है, अत: भूल-चूक से बचने के लिए चेन के साथ सुओं की सख्या (10 सुए) निर्धारित कर दी गई है।