Q: ‘‘गद्य जीवन संग्राम की भाषा है।’’ उक्त कथन किस रचनाकार का है?
A.
जयशंकर प्रसाद
B.
महावीर प्रसाद द्विवेदी
C.
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
D.
उपर्युक्त में से एक से अधिक
E.
उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer:
Option C - ‘सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला’ जी ने गद्य को जीवन संग्राम की भाषा माना है। उन्होंने यह ‘कुल्लीभार’ तथा बिल्लेसुर बकरिहा’ उपन्यास लिखने के बाद महसूस किया था।
C. ‘सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला’ जी ने गद्य को जीवन संग्राम की भाषा माना है। उन्होंने यह ‘कुल्लीभार’ तथा बिल्लेसुर बकरिहा’ उपन्यास लिखने के बाद महसूस किया था।
Explanations:
‘सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला’ जी ने गद्य को जीवन संग्राम की भाषा माना है। उन्होंने यह ‘कुल्लीभार’ तथा बिल्लेसुर बकरिहा’ उपन्यास लिखने के बाद महसूस किया था।
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