Correct Answer:
Option B - अदित्तपरियाय सुत्त को अग्नि उपदेश (Fire Sermon) के रूप में जाना जाता है। इस प्रवचन में बुद्ध पाँचों इंद्रियों और मन से वैराग्य के माध्यम से दु:ख से मुक्ति प्राप्त करने का उपदेश देते है।
धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त (पालि में) या धर्मचक्रप्रवर्तनसूत्र (संस्कृत में), बौद्ध ग्रन्थ है जिसमें गौतम बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति के बाद दिया गया प्रथम उपदेश संग्रहीत है।
अनात्त-लक्खना सुत्त (पालि), या अनात्मलत्त सूत्र (संस्कृत में), को पारंपरिक रूप से गौतम बुद्ध द्वारा दिया गया दूसरे प्रवचन के रूप में दर्ज किया गया है। जिसे पंचवर्गीय सूत्र के रूप में जाना जाता है। जिसका अर्थ है ‘‘पाँच लोगों का समूह’’।
B. अदित्तपरियाय सुत्त को अग्नि उपदेश (Fire Sermon) के रूप में जाना जाता है। इस प्रवचन में बुद्ध पाँचों इंद्रियों और मन से वैराग्य के माध्यम से दु:ख से मुक्ति प्राप्त करने का उपदेश देते है।
धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त (पालि में) या धर्मचक्रप्रवर्तनसूत्र (संस्कृत में), बौद्ध ग्रन्थ है जिसमें गौतम बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति के बाद दिया गया प्रथम उपदेश संग्रहीत है।
अनात्त-लक्खना सुत्त (पालि), या अनात्मलत्त सूत्र (संस्कृत में), को पारंपरिक रूप से गौतम बुद्ध द्वारा दिया गया दूसरे प्रवचन के रूप में दर्ज किया गया है। जिसे पंचवर्गीय सूत्र के रूप में जाना जाता है। जिसका अर्थ है ‘‘पाँच लोगों का समूह’’।