Correct Answer:
Option B - ‘गतं तिरश्चीनमनूरुसारथे:’’ अनूरुसारथे: पद का अर्थ सूर्य है। यह सूक्ति महाकवि माघ कृत् शिशुपालवधम् की है।
‘‘गतं तिरश्चीनमनूरुसारथे:’’
प्रसिद्धमूध्र्वज्वलनं हविर्भुज:।
पतत्यधो धाम विसारि सर्वत:
किमेतदित्याकुलमीक्षितं जनै:।।’’
अर्थात् - सूर्य की गति तिरछी प्रसिद्ध है और अग्नि का ऊपर जलना प्रसिद्ध है। (किन्तु) सब ओर फैलने वाला तेज नीचे आ रहा है। यहाँ क्या है - इस प्रकार लोगों ने व्यग्रता-पूर्वक देखा।
B. ‘गतं तिरश्चीनमनूरुसारथे:’’ अनूरुसारथे: पद का अर्थ सूर्य है। यह सूक्ति महाकवि माघ कृत् शिशुपालवधम् की है।
‘‘गतं तिरश्चीनमनूरुसारथे:’’
प्रसिद्धमूध्र्वज्वलनं हविर्भुज:।
पतत्यधो धाम विसारि सर्वत:
किमेतदित्याकुलमीक्षितं जनै:।।’’
अर्थात् - सूर्य की गति तिरछी प्रसिद्ध है और अग्नि का ऊपर जलना प्रसिद्ध है। (किन्तु) सब ओर फैलने वाला तेज नीचे आ रहा है। यहाँ क्या है - इस प्रकार लोगों ने व्यग्रता-पूर्वक देखा।