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Q: गुप्तकाल में सार्थवाह कहा जाता था
  • A. जिला प्रशासन का प्रमुख
  • B. व्यापारिक कारवाँ का प्रमुख
  • C. समिति का प्रमुख
  • D. श्रेणी का प्रमुख
Correct Answer: Option B - गुप्तकाल में वाणिज्यिक निकायों को उनके वास्तविक कार्य या स्वरूप के आधार पर विभाजन हुआ था। व्यापारियों की एक समिति होती थी जिसे निगम कहा जाता था। निगम का प्रधान श्रेष्ठि कहलाता था, व्यापारियों के समूह को सार्थ तथा उनके नेताओं को सार्थवाह कहा जाता था। नगर श्रेष्ठिन बैंकरों एवं साहूकार के रूप में कार्य करते थे।
B. गुप्तकाल में वाणिज्यिक निकायों को उनके वास्तविक कार्य या स्वरूप के आधार पर विभाजन हुआ था। व्यापारियों की एक समिति होती थी जिसे निगम कहा जाता था। निगम का प्रधान श्रेष्ठि कहलाता था, व्यापारियों के समूह को सार्थ तथा उनके नेताओं को सार्थवाह कहा जाता था। नगर श्रेष्ठिन बैंकरों एवं साहूकार के रूप में कार्य करते थे।

Explanations:

गुप्तकाल में वाणिज्यिक निकायों को उनके वास्तविक कार्य या स्वरूप के आधार पर विभाजन हुआ था। व्यापारियों की एक समिति होती थी जिसे निगम कहा जाता था। निगम का प्रधान श्रेष्ठि कहलाता था, व्यापारियों के समूह को सार्थ तथा उनके नेताओं को सार्थवाह कहा जाता था। नगर श्रेष्ठिन बैंकरों एवं साहूकार के रूप में कार्य करते थे।