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Q: गुप्तकाल की सर्वप्रमुख विशेषता है─
  • A. मूर्तिकला
  • B. मंदिरों का निर्माण
  • C. चित्रकला
  • D. काष्ठकला
Correct Answer: Option B - 1863 ई. पूर्व मद्रास के समीप `पूर्व प्रस्तर युग' के एक कलापूर्ण शिलाखण्ड का पता लगा था। इसी प्रकार 1880 ई. मिर्जापुर में पंख-पोशाक युक्त अनेक चित्र खुदी चट्टानों पर मिले हैं, जो प्रागैतिहासिक महत्व के हैं। गुप्तयुगीन वास्तुकला के सर्वोत्तम उदाहरण मन्दिर है। वस्तुत: मन्दिर के अवशेष हमें इसी काल से मिलने लगते हैं। गुप्तयुगीन मंदिरों का निर्माण सामान्यत: एक ऊँचे चबूतरे पर हुआ था जिन पर चढ़ने के लिए चारों ओर सीढ़ियाँ बनाई गई थी।
B. 1863 ई. पूर्व मद्रास के समीप `पूर्व प्रस्तर युग' के एक कलापूर्ण शिलाखण्ड का पता लगा था। इसी प्रकार 1880 ई. मिर्जापुर में पंख-पोशाक युक्त अनेक चित्र खुदी चट्टानों पर मिले हैं, जो प्रागैतिहासिक महत्व के हैं। गुप्तयुगीन वास्तुकला के सर्वोत्तम उदाहरण मन्दिर है। वस्तुत: मन्दिर के अवशेष हमें इसी काल से मिलने लगते हैं। गुप्तयुगीन मंदिरों का निर्माण सामान्यत: एक ऊँचे चबूतरे पर हुआ था जिन पर चढ़ने के लिए चारों ओर सीढ़ियाँ बनाई गई थी।

Explanations:

1863 ई. पूर्व मद्रास के समीप `पूर्व प्रस्तर युग' के एक कलापूर्ण शिलाखण्ड का पता लगा था। इसी प्रकार 1880 ई. मिर्जापुर में पंख-पोशाक युक्त अनेक चित्र खुदी चट्टानों पर मिले हैं, जो प्रागैतिहासिक महत्व के हैं। गुप्तयुगीन वास्तुकला के सर्वोत्तम उदाहरण मन्दिर है। वस्तुत: मन्दिर के अवशेष हमें इसी काल से मिलने लगते हैं। गुप्तयुगीन मंदिरों का निर्माण सामान्यत: एक ऊँचे चबूतरे पर हुआ था जिन पर चढ़ने के लिए चारों ओर सीढ़ियाँ बनाई गई थी।