Correct Answer:
Option D - गणितीय ज्ञान की रचना में संस्कृति और संदर्भों की कोई भूमिका नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अनुसार, ‘‘गणित को इस रुप में देखना चाहिए कि वह एक वाहन है जिसके माध्यम द्वारा बच्चे को सोचना, समझना, तर्कशील विश्लेषण करना स्पष्ट किया जाता है। ये अपने आप में विशिष्ट विषय है तथा किसी भी अन्य विषय का सहगामी हो सकता है, जो कि विश्लेषण तथा तर्क विद्या पर बल देता है।’’
D. गणितीय ज्ञान की रचना में संस्कृति और संदर्भों की कोई भूमिका नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अनुसार, ‘‘गणित को इस रुप में देखना चाहिए कि वह एक वाहन है जिसके माध्यम द्वारा बच्चे को सोचना, समझना, तर्कशील विश्लेषण करना स्पष्ट किया जाता है। ये अपने आप में विशिष्ट विषय है तथा किसी भी अन्य विषय का सहगामी हो सकता है, जो कि विश्लेषण तथा तर्क विद्या पर बल देता है।’’