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Q: ‘‘गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वय:’’ यह सूक्ति वाक्य है
  • A. उत्तर रामचरित में
  • B. अभिज्ञान शाकुन्तल में
  • C. मृच्छकटिक में
  • D. मालविकाग्निमित्र में
Correct Answer: Option A - गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्ं न च वय:। यह सूक्ति उत्तररामचरितम् की है। सूक्ति का अर्थ है - गुणवानों में गुण ही पूजा के स्थान होते हैं, न कोई चिह्न-विशेष और न आयु।
A. गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्ं न च वय:। यह सूक्ति उत्तररामचरितम् की है। सूक्ति का अर्थ है - गुणवानों में गुण ही पूजा के स्थान होते हैं, न कोई चिह्न-विशेष और न आयु।

Explanations:

गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्ं न च वय:। यह सूक्ति उत्तररामचरितम् की है। सूक्ति का अर्थ है - गुणवानों में गुण ही पूजा के स्थान होते हैं, न कोई चिह्न-विशेष और न आयु।