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Q: ‘गगनचुम्बी’ शब्द में कौन-सा समास है?
  • A. तत्पुरुष समास
  • B. बहुव्रीहि समास
  • C. अव्ययीभाव समास
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - गगन चुम्बी में तत्पुरूष समास है। ⇒ गगनचुम्बी जिसका अर्थ है-गगन को चुमने वाला। यह कर्म तत्पुरुष समास है। ⇒ तत्पुरुष समास-तत्पुरुष समास में अंतिम पद प्रधान होता है। इस समास में साधारणत: प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है। द्वितीय पद, अर्थात् बाद वाले पद के विशेष्य होने के कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है। इस समास के तीन भेद है-(1) तत्पुरुष (2) कर्मधारय (3) द्विगु ⇒ जिस तत्पुरुष समास में कर्ताकारक की प्रथमा विभक्ति छिपी रहती है, उसे समानाधिकरण तत्पुरुष अथवा कर्मधारय समास कहते है। अगर इस कर्मधारय का पूर्व पद प्रथमा विभक्ति का संख्या वाचक शब्द है, तो उसे ‘द्विगु समास’ कहते है। ⇒ अव्ययीभाव समास-जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए। इस समास में समूचा पर क्रिया विशेषण अव्यय हो जाता है। इसमें पहला पद उपसर्ग आदि जाति का अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। जैसे-प्रतिदिन, यथा शक्ति। ⇒ बहुब्रीहि समास-जिस समास का कोई भी पद प्रधान होता है और जो अपने-अपने पदों से भिन्न तीसरे अर्थ की व्यंजना करता है। बहुव्रीहि समास कहते है। जैसे- चन्द्रमौलि-चन्द्र है सिर पर जिसके अर्थात् शिव वीणापाणि-वीणा है पाणि में जिसके अर्थात् सरस्वती
A. गगन चुम्बी में तत्पुरूष समास है। ⇒ गगनचुम्बी जिसका अर्थ है-गगन को चुमने वाला। यह कर्म तत्पुरुष समास है। ⇒ तत्पुरुष समास-तत्पुरुष समास में अंतिम पद प्रधान होता है। इस समास में साधारणत: प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है। द्वितीय पद, अर्थात् बाद वाले पद के विशेष्य होने के कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है। इस समास के तीन भेद है-(1) तत्पुरुष (2) कर्मधारय (3) द्विगु ⇒ जिस तत्पुरुष समास में कर्ताकारक की प्रथमा विभक्ति छिपी रहती है, उसे समानाधिकरण तत्पुरुष अथवा कर्मधारय समास कहते है। अगर इस कर्मधारय का पूर्व पद प्रथमा विभक्ति का संख्या वाचक शब्द है, तो उसे ‘द्विगु समास’ कहते है। ⇒ अव्ययीभाव समास-जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए। इस समास में समूचा पर क्रिया विशेषण अव्यय हो जाता है। इसमें पहला पद उपसर्ग आदि जाति का अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। जैसे-प्रतिदिन, यथा शक्ति। ⇒ बहुब्रीहि समास-जिस समास का कोई भी पद प्रधान होता है और जो अपने-अपने पदों से भिन्न तीसरे अर्थ की व्यंजना करता है। बहुव्रीहि समास कहते है। जैसे- चन्द्रमौलि-चन्द्र है सिर पर जिसके अर्थात् शिव वीणापाणि-वीणा है पाणि में जिसके अर्थात् सरस्वती

Explanations:

गगन चुम्बी में तत्पुरूष समास है। ⇒ गगनचुम्बी जिसका अर्थ है-गगन को चुमने वाला। यह कर्म तत्पुरुष समास है। ⇒ तत्पुरुष समास-तत्पुरुष समास में अंतिम पद प्रधान होता है। इस समास में साधारणत: प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है। द्वितीय पद, अर्थात् बाद वाले पद के विशेष्य होने के कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है। इस समास के तीन भेद है-(1) तत्पुरुष (2) कर्मधारय (3) द्विगु ⇒ जिस तत्पुरुष समास में कर्ताकारक की प्रथमा विभक्ति छिपी रहती है, उसे समानाधिकरण तत्पुरुष अथवा कर्मधारय समास कहते है। अगर इस कर्मधारय का पूर्व पद प्रथमा विभक्ति का संख्या वाचक शब्द है, तो उसे ‘द्विगु समास’ कहते है। ⇒ अव्ययीभाव समास-जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए। इस समास में समूचा पर क्रिया विशेषण अव्यय हो जाता है। इसमें पहला पद उपसर्ग आदि जाति का अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। जैसे-प्रतिदिन, यथा शक्ति। ⇒ बहुब्रीहि समास-जिस समास का कोई भी पद प्रधान होता है और जो अपने-अपने पदों से भिन्न तीसरे अर्थ की व्यंजना करता है। बहुव्रीहि समास कहते है। जैसे- चन्द्रमौलि-चन्द्र है सिर पर जिसके अर्थात् शिव वीणापाणि-वीणा है पाणि में जिसके अर्थात् सरस्वती