Correct Answer:
Option D - गंगा के मध्यवर्ती मैदान में पाई जाने वाली चूना-प्रधान जलोढ़ मृदा को रेह, भूड़ तथा भाट कहा जाता है। इस मिट्टी में चूनेदार कंकड़ के पिण्ड अधिक पाये जाते हैं। कहीं-कहीं पर लवणीय और क्षारीय प्रस्फुटन के कारण इनमें रेह के जमाव देखे जाते हैं, जिससे ऊसर क्षेत्र बन गये हैं। इन मिट्टियों में नियमित उर्वरकों की आवश्यकता होती है।
D. गंगा के मध्यवर्ती मैदान में पाई जाने वाली चूना-प्रधान जलोढ़ मृदा को रेह, भूड़ तथा भाट कहा जाता है। इस मिट्टी में चूनेदार कंकड़ के पिण्ड अधिक पाये जाते हैं। कहीं-कहीं पर लवणीय और क्षारीय प्रस्फुटन के कारण इनमें रेह के जमाव देखे जाते हैं, जिससे ऊसर क्षेत्र बन गये हैं। इन मिट्टियों में नियमित उर्वरकों की आवश्यकता होती है।