On which day is World Day to combat desertification and drought observed?
हारुन एक फल की दुकान पर गया। उसने डेढ़ दर्जन केले 2.50 प्रति केला की दर से, साढ़े तीन किलो सेब 57.60 प्रति किलो की दर से, डेढ़ किलो आम `75.40 प्रति किलो की दर से और 750ग्राम अंगूर 120 प्रति किलो की दर से खरीदे। यदि उसने फल विक्रेता को 500 का एक नोट दिया हो, तो उसे विक्रेता से वापस मिलेंगे-
भारत इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF) 2025 का मुख्य विषय (Theme) क्या है?
हाल ही में टाटो-I हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट किस राज्य में स्थित है?
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यदि आई.टी. (I.T) विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या का 80% और मानव संसाधन (HR) व लेखा (Accounts) दोनों विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या का 40% महिलाएं हैं, तो इन तीनों विभागों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की कुल संख्या .......है।
An isobar is a curve connecting all points of _______below the ground. समदाब रेखा भूमि के नीचे _______ को जोड़ने वाला एक वक्र है।
For computer bit is a portmanteau of......? /कम्प्यूटर के लिए, बिट ( Bit) ...... का पोर्टमैंटू है?
For a 10 kVA single-phase transformer, if the iron losses at half load are 500 W, then the iron losses at full load will be .............. एक 10 kVA एकल फेज ट्रांसफार्मर के लिए, यदि अर्द्ध लोड पर लौह हानि 500 W है, तो पूर्ण लोड पर लौह हानि ............ होगी।
अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानां (69-75) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत– एक: धार्मिक: सत्सङ्गानुरागी राजा आसीत्। स: दूर-दूरात् साधून् महात्मन: आहूय तेभ्य: ज्ञानोपदेशं शृणोति तानि धनादि-प्रदानेन सम्मानयति स्म। एकदा एक: महात्मा तत: दान दक्षिणाम् आदाय परावर्तमान: कैश्चित् दस्युभि: दृष्टि:। ते दस्यव: तस्य साधो: हस्तौ कर्तयित्वा दान-दक्षिणाम् अच्छिद्य च पलायितवन्त:। कतिपय-मासान्तरं स: एव महात्मा राज्ञा पुनरपि भगवच्चर्चायै आहूत:। अस्मिन् वारे दस्तव: अति साधु-वेषं धृत्वा तस्मिन् राजकीये सत्सङ्गे समुपस्थिता:। तान् दृष्ट्वा कृत्त-हस्त: महात्मा राजानं कथितवान् – ‘‘महाराज! इमे साधव: मम ज्ञानिन: सुहृद: सन्ति। इमे अवश्यं सम्माननीया:।’’ राजा तान् अपूजयतु, एकां बृहर्ती धन-पेटिकां च तेषाम् आवासे प्रापयितुं स्वकीयम् एकं कर्मचारिणं प्रेषितवान्। मार्गे कर्मचारी तान् साधून् अपृच्छत् – ‘‘कथ्यताम् महात्मा कथं जनाति? कथम् असौ भवद्भ्य: इदं धनम् अदापयत् ?’’ साधव: उदतरन् -‘‘स: मृत्युमुखे आसीत्। वयम् एव तं मृत्यो: अमोचयाम। हस्तौ एक तस्य कार्तितौ अभवताम्। अत: एव उपकारकान् अस्मान् स: महाराजेन सममानयत्।’’ पृथ्वी माता तेषाम् इमां निराधार-वार्तां न असहत। सा व्यदीर्यत। तत्र एव ते व्यलीयन्त। विस्मित: कर्मचारी राजानम् उपगत्य सर्वां घटनाम् अश्रावयत्। कृत्त-हस्त: महात्मा अपि तदा तत्र एव आसीत्। स: अपि तै: साधुभि: सह दुर्घटितां घटनाम् आकर्ण्य अतीव दु:खित: अभवत्, उच्चै: उच्चै: रोदितुं प्रावर्तत च। किन्तु आश्चर्यं! महत् आश्चर्यम् !! तदा एवं स: महात्मा पुन: उत्पन्न-हस्त: अजायत। राजा तद् एतद् दृष्ट्वा रहस्यम् एतस्य कथयितुं महात्मानं प्रार्थितवान्। महात्मा अकथयत्- ‘‘राजन्! सत्यम् एव ते साधव: मम सुहृद: सन्ति। भवद्भ्य: धन-ग्रहीतारौ हस्तौ छित्वा ते माम् उपकृतवन्त: एव। किन्तु भगवत्कृपया तो पुनर् अपित उत्पन्नौ। मम एव कारणने ते पृथिव्यां व्यलीयन्त। मम एव कारणेन तेषां सुहृदां वियोगेन अहम् इदानीं भृशं दु:खी सञ्चात: विलयामि च’’ इति। पृथ्वीमाता किं न असहत्?
Explanations:
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