Correct Answer:
Option B - दो–घातीय (Two–Stroke) इंजनों का बाजार में पदार्पण 1950–50 के बीच में हुआ था। द्वि–स्ट्रोक इंजन की क्रियाओं (चूषण, संपीडन, विस्तार, निकास) का एक पूरा चक्र पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूर्ण होता है। इसमें क्रैंकशाफ्ट एक पूरा चक्कर लगाती है। तथा एक पूरे चक्र में एक शक्ति स्ट्रोक प्राप्त होता है।
B. दो–घातीय (Two–Stroke) इंजनों का बाजार में पदार्पण 1950–50 के बीच में हुआ था। द्वि–स्ट्रोक इंजन की क्रियाओं (चूषण, संपीडन, विस्तार, निकास) का एक पूरा चक्र पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूर्ण होता है। इसमें क्रैंकशाफ्ट एक पूरा चक्कर लगाती है। तथा एक पूरे चक्र में एक शक्ति स्ट्रोक प्राप्त होता है।