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Q: ‘फूले कास सकल महि छाई। जनु बरसा रितु प्रकट बुढ़ाई।।’ - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
  • A. उत्प्रेक्षा
  • B. रूपक
  • C. उपमा
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - काव्य पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। ⇒ मानो, मानहु, मनहु, मन, जानो, जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव आदि उत्पे्रक्षा के वाचक शब्द है। उदाहरण-चमचमात चंचल नयन विच घूँघट पर झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरत् युगमीन।।
A. काव्य पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। ⇒ मानो, मानहु, मनहु, मन, जानो, जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव आदि उत्पे्रक्षा के वाचक शब्द है। उदाहरण-चमचमात चंचल नयन विच घूँघट पर झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरत् युगमीन।।

Explanations:

काव्य पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है। उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। ⇒ मानो, मानहु, मनहु, मन, जानो, जानहु, जनु, निश्चय, मेरे जान, इव आदि उत्पे्रक्षा के वाचक शब्द है। उदाहरण-चमचमात चंचल नयन विच घूँघट पर झीन। मानहु सुरसरिता विमल जल उछरत् युगमीन।।