Correct Answer:
Option C - फक्प्रत्यययोगाद् निष्पन्नं पदं ‘गाग्र्यायण:’ अस्ति। फक् प्रत्यय के प्रयोग से ‘गाग्र्यायण:’ पद निष्पन्न होता है। ‘आयनेयीनीयिय: फढखछघां प्रत्ययादीनाम्’ (काशिका वृत्ति 7.1.2) सूत्र से फ को आयन्, ढ को एय्, ख को ईन्, छ को ईय् और घ को इय् आदेश होता है। ‘नडादिभ्य: फक्’ सूत्र से अपत्य अर्थ फक् प्रत्यय होता है।
उदाहरण- गार्गी+फक् (अपत्य अर्थ में) तब ‘आयनेयीनीयिय: फढखछद्यां प्रत्ययादीनाम्’ सूत्र से, पहले क् को इत्संज्ञा और लोप के पश्चात् ‘ख’ को आयन् आदेश हुआ फिर गार्गी + आयन् के सन्धि कार्य और सुप् विभक्ति लगने पर ‘गाग्र्यायण:’ रूप सिद्ध हुआ।
C. फक्प्रत्यययोगाद् निष्पन्नं पदं ‘गाग्र्यायण:’ अस्ति। फक् प्रत्यय के प्रयोग से ‘गाग्र्यायण:’ पद निष्पन्न होता है। ‘आयनेयीनीयिय: फढखछघां प्रत्ययादीनाम्’ (काशिका वृत्ति 7.1.2) सूत्र से फ को आयन्, ढ को एय्, ख को ईन्, छ को ईय् और घ को इय् आदेश होता है। ‘नडादिभ्य: फक्’ सूत्र से अपत्य अर्थ फक् प्रत्यय होता है।
उदाहरण- गार्गी+फक् (अपत्य अर्थ में) तब ‘आयनेयीनीयिय: फढखछद्यां प्रत्ययादीनाम्’ सूत्र से, पहले क् को इत्संज्ञा और लोप के पश्चात् ‘ख’ को आयन् आदेश हुआ फिर गार्गी + आयन् के सन्धि कार्य और सुप् विभक्ति लगने पर ‘गाग्र्यायण:’ रूप सिद्ध हुआ।