Correct Answer:
Option A - ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ समतल हो वह समतल दर्पण कहलाता है। समतल दर्पण का उपयोग आईना (Mirror) बनाने में होता है। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति आभासी और सीधी (पार्श्व तौर पर उल्टी) होती है तथा प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु को दर्पण के सामने रखा होता है।
A. ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ समतल हो वह समतल दर्पण कहलाता है। समतल दर्पण का उपयोग आईना (Mirror) बनाने में होता है। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति आभासी और सीधी (पार्श्व तौर पर उल्टी) होती है तथा प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु को दर्पण के सामने रखा होता है।