Correct Answer:
Option B - पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के औपचारिक संक्रिया काल के दौरान बच्चे द्वारा प्रतीकात्मक तर्क जैसे, अभिप्रेतार्थ (यदि तब), वियोजन (दोनों में से एक या दोनों) के प्रस्तावात्मक संयोजन प्राप्त किए जाते है। औपचारिक संक्रियात्मक काल (11 से 15 वर्ष) तक की होती है। इस अवस्था में बालक विचार करने की योग्यता एवं चिंतन शक्ति अर्जित कर लेता है। वह अमूर्त संबंधों के विषय में चिंतन एवं समस्या समाधान भी करने लगता है। इस प्रकार यह सोद्देश्य चितंन की अवस्था है। यह अवस्था जीन पियाजे की चौथी अवस्था है जिसे अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था भी कहा जाता है।
B. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के औपचारिक संक्रिया काल के दौरान बच्चे द्वारा प्रतीकात्मक तर्क जैसे, अभिप्रेतार्थ (यदि तब), वियोजन (दोनों में से एक या दोनों) के प्रस्तावात्मक संयोजन प्राप्त किए जाते है। औपचारिक संक्रियात्मक काल (11 से 15 वर्ष) तक की होती है। इस अवस्था में बालक विचार करने की योग्यता एवं चिंतन शक्ति अर्जित कर लेता है। वह अमूर्त संबंधों के विषय में चिंतन एवं समस्या समाधान भी करने लगता है। इस प्रकार यह सोद्देश्य चितंन की अवस्था है। यह अवस्था जीन पियाजे की चौथी अवस्था है जिसे अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था भी कहा जाता है।