Correct Answer:
Option A - Ca⁺⁺ की प्रचुरता में प्रत्येक पेशीतन्तु में मायोसीन एवं एक्टिन के बीच एक्टोमायोसिन के सेतुबन्ध बनते है जो तन्तुओ को सिकोड़ने का कार्य करती है। तन्तुओ के सिकुड़ते ही Ca⁺⁺ वापस पेशीद्रव्यीय जालिका में वापस पम्प कर दिये जाते है। जो ट्रोपोनिन एक्टिन को निष्क्रीय बना देती है जिससे सेतुबन्ध खुल जाते है एक्टिन टुकड़े यथास्थान पहुँच जाती है और इस प्रकार पेशी का शिथिलन हो जाता है।
A. Ca⁺⁺ की प्रचुरता में प्रत्येक पेशीतन्तु में मायोसीन एवं एक्टिन के बीच एक्टोमायोसिन के सेतुबन्ध बनते है जो तन्तुओ को सिकोड़ने का कार्य करती है। तन्तुओ के सिकुड़ते ही Ca⁺⁺ वापस पेशीद्रव्यीय जालिका में वापस पम्प कर दिये जाते है। जो ट्रोपोनिन एक्टिन को निष्क्रीय बना देती है जिससे सेतुबन्ध खुल जाते है एक्टिन टुकड़े यथास्थान पहुँच जाती है और इस प्रकार पेशी का शिथिलन हो जाता है।