Correct Answer:
Option A - स्थानीय पारिस्थितिकीय परिस्थितियों और उनकी जल आवश्यकतानुसार वर्षाजल, भौमजल, नदी जल और बाढ़ जल के संग्रहण हेतु अनेक तरीके विकसित किये थे। पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने ‘गुल’ अथवा ‘कुल’ (पश्चिमी हिमालय) जैसी वाहिकाएँ नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई हेतु बनाई हैं, जबकि ‘खादीन’ शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में गड्ढे बनाकर वर्षा जल का संग्रहण ताकि मृदा को सिंचित किया जा सके और संरक्षित जल को खेती के लिए उपयोग में लाया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर में खादीन और जिसे अन्य क्षेत्रों में ‘‘जोहड़’’ कहते हैं। पालर पानी, वर्षा के जल को कहा जाता है जिसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है। अत: विकल्प (a) सही है।
A. स्थानीय पारिस्थितिकीय परिस्थितियों और उनकी जल आवश्यकतानुसार वर्षाजल, भौमजल, नदी जल और बाढ़ जल के संग्रहण हेतु अनेक तरीके विकसित किये थे। पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने ‘गुल’ अथवा ‘कुल’ (पश्चिमी हिमालय) जैसी वाहिकाएँ नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई हेतु बनाई हैं, जबकि ‘खादीन’ शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में गड्ढे बनाकर वर्षा जल का संग्रहण ताकि मृदा को सिंचित किया जा सके और संरक्षित जल को खेती के लिए उपयोग में लाया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर में खादीन और जिसे अन्य क्षेत्रों में ‘‘जोहड़’’ कहते हैं। पालर पानी, वर्षा के जल को कहा जाता है जिसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है। अत: विकल्प (a) सही है।