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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए : (89-93)
सभ्यता बदल गयी, पूरा युग पलट गया शासन और राज्य बदल गए। अनेक कच्चे घर पक्कों में परिवर्तित हो गए। कहीं-कहीं बिजली से चलने वाले नलकूप और खेत-क्यारियों को रौंदते-चिंघाड़ते ट्रैक्टर भी दिखाई देते हैं-‘‘भैया, राम राम, बाबूजी, जय रामजी की!’’ अभी भी मुझे राह-घाट में देखते ही बहुएँ सिर पर पल्ला कर लेती हैं, लड़कियाँ शरमाकर आँखें झुका लेती हैं तथा बड़े–बूढ़े आशीर्वाद देते हैंं। बैठकों, चौपालों पर हुक्के गुड़गुड़ाए जाते हैं और गाँव-जहान की सैकड़ों चर्चाएँ रस लेकर सुनी-सुनाई जाती हैं। अभी भी उन कच्चे-पक्के घरों के लम्बे-चौड़े आँगन गोबर से कलात्मक ढंग से लिपे-पुते हैं। उन घरों के झाड़े बुहारे दर-द्वार उन गरीब नर-नारियों की परिश्रमशीलता और कलात्मक रुचि संस्कारों को प्रकट करते हैं।
बहुएँ सिर पर पल्ला कहाँ ढक लेती हैं?