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Q: ड्रिलिंग करते समय टोटी के पानी को कुलेंट की तरह प्रयोग करने को वरीयता नहीं दी जाती है। इसका क्या कारण है–
  • A. अपर्याप्त कूलिंग प्रभाव
  • B. जंग आदि लगने का खतरा
  • C. ड्रिल के किंटग ऐक्शन में कमी आना
  • D. पानी का तेजी से भाप के रूप में बनना
Correct Answer: Option B - ड्रिलिंग करते समय टोटी के पानी को कूलेंट की तरह प्रयोग करने के वरीयता नहीं दी जाती है क्योंकि जंग लगने का खतरा रहता है। ड्रिलिंग करते समय निम्न कुलेंट का प्रयोग किया जाता है। हाई कार्बन स्टील के लिए, लार्ड आयल, सॉल्युबल आयल का प्रयोग किया जाता है। कॉपर, एल्युमीनियम के लिए मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जाता है।
B. ड्रिलिंग करते समय टोटी के पानी को कूलेंट की तरह प्रयोग करने के वरीयता नहीं दी जाती है क्योंकि जंग लगने का खतरा रहता है। ड्रिलिंग करते समय निम्न कुलेंट का प्रयोग किया जाता है। हाई कार्बन स्टील के लिए, लार्ड आयल, सॉल्युबल आयल का प्रयोग किया जाता है। कॉपर, एल्युमीनियम के लिए मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जाता है।

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ड्रिलिंग करते समय टोटी के पानी को कूलेंट की तरह प्रयोग करने के वरीयता नहीं दी जाती है क्योंकि जंग लगने का खतरा रहता है। ड्रिलिंग करते समय निम्न कुलेंट का प्रयोग किया जाता है। हाई कार्बन स्टील के लिए, लार्ड आयल, सॉल्युबल आयल का प्रयोग किया जाता है। कॉपर, एल्युमीनियम के लिए मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जाता है।