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Q: ड्रिल स्लीव का प्रयोग तब किया जाता है जब ड्रिल की टेपर शैंक –
  • A. मशीन के स्पिण्डल की अपेक्षा छोटी होती है
  • B. मशीन के स्पिण्डल की अपेक्षा बड़ी होती है
  • C. मशीन के स्पिण्डल के बराबर होती है
  • D. उपरोक्त में कोई नहीं
Correct Answer: Option A - जब ड्रिल की टेपर शैंक मशीन के स्पिण्डल की अपेक्षा छोटी होती है, तब ड्रिल स्लीव का प्रयोग किया जाता है। मशीन के स्पिंडल से विभिन्न माप के शैंक वाले ड्रिलों को मशीन में पकड़ने के लिए स्लीव या सॉकेट का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न नम्बरों की मापों में छोटे तथा बड़े ड्रिल बनाये जाते है। इनके नम्बर 0–1, 1–2, 2–3, 3–4 इत्यादि होते है। इनमें पहला नम्बर स्लीव के अन्दर की माप तथा दूसरा नम्बर स्लीव के बाहर की माप दर्शाता है।
A. जब ड्रिल की टेपर शैंक मशीन के स्पिण्डल की अपेक्षा छोटी होती है, तब ड्रिल स्लीव का प्रयोग किया जाता है। मशीन के स्पिंडल से विभिन्न माप के शैंक वाले ड्रिलों को मशीन में पकड़ने के लिए स्लीव या सॉकेट का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न नम्बरों की मापों में छोटे तथा बड़े ड्रिल बनाये जाते है। इनके नम्बर 0–1, 1–2, 2–3, 3–4 इत्यादि होते है। इनमें पहला नम्बर स्लीव के अन्दर की माप तथा दूसरा नम्बर स्लीव के बाहर की माप दर्शाता है।

Explanations:

जब ड्रिल की टेपर शैंक मशीन के स्पिण्डल की अपेक्षा छोटी होती है, तब ड्रिल स्लीव का प्रयोग किया जाता है। मशीन के स्पिंडल से विभिन्न माप के शैंक वाले ड्रिलों को मशीन में पकड़ने के लिए स्लीव या सॉकेट का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न नम्बरों की मापों में छोटे तथा बड़े ड्रिल बनाये जाते है। इनके नम्बर 0–1, 1–2, 2–3, 3–4 इत्यादि होते है। इनमें पहला नम्बर स्लीव के अन्दर की माप तथा दूसरा नम्बर स्लीव के बाहर की माप दर्शाता है।